बांदा। बुंदेलखंड में पौधरोपण को लेकर उठते रहे सवाल और जांचों की औपचारिकता के बीच चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में एनएएफसीसी योजना के तहत रोपे गए सात लाख नौ हजार पौधे और चारागाह विकास पर खर्च हुए 11.23 करोड़ पर उंगली उठ रही है।
एनएएफसीसी योजना के तहत चित्रकूट मंडल के तीन जिलों में 753 हेक्टेअर क्षेत्रफल में 7 लाख 9 हजार 75 पौधे लगाए गए हैं। इन पर 11 करोड़ 23 लाख खर्च बताए गए हैं। योजना के तहत तीनों जनपदों में पौधरोपण, हार्टीसिल्वी वृक्षारोपण, चारागाह विकास और मृदा जल संरक्षण बंधों पर बांस के पौधरोपण बताए गए हैं।
वर्ष 2018-19 से संचालित हुई यह योजना 19 करोड़ 8 लाख रुपये लागत की बताई गई है। तीनों जिलों में 11 करोड़ 23 लाख रुपये खर्च हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक कई स्थलों पर दर्शाए गए पौधे नदारद मिलने पर विभागीय उच्चाधिकारियों ने सत्यापन और जांच पड़ताल की है। इसमें घोटाले के आसार हैं। विभागीय अधिकारी गुपचुप ढंग से इसकी जांच पड़ताल तो कर रहे हैं फिलहाल कुछ बता नहीं रहे हैं।
जिला क्षेत्रफल पौधरोपण खर्च
बांदा 135 88,225 2.12
हमीरपुर 428 4,67,200 5.11
चित्रकूट 190 1,59,650 4.00
योग 753 7,09,075 11.23
संयुक्त वन प्रबंध समितियों ने कराया पौधरोपण
योजना में पौधरोपण आदि कार्य गांवों की संयुक्त वन प्रबंध समितियों ने कराए हैं। बांदा में सढ़ा, करतल, डड़वा मानपुर और अमारा संयुक्त वन प्रबंध समितियों ने पौधरोपण, चारागाह विकास आदि कराया है। चित्रकूट में पथरौड़ी, अमीरनपुर छिवलहा (हरियरपुर), दुगवां और झरी वन प्रबंध समिति ने कार्य कराए हैं। हमीरपुर में बिहुनी खुर्द, गोहानी-पनवाड़ी, बेंदाडाड़ा और देवखरी गांवों की संयुक्त वन प्रबंध समितियों ने पौध रोपण कराया है।
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डीएफओ ने अभिलेखों की समीक्षा की
एनएएफसीसी योजना को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी बांदा संजय अग्रवाल ने सोमवार (25 अक्तूबर) को बांदा, तिंदवारी और पैलानी रेंज अधिकारियों को अभिलेखों के साथ तलब किया और योजना की प्रगति समीक्षा की। साथ ही सितंबर माह का लेखा भी तलब किया। प्रभागीय वनाधिकारी से समितिवार प्रगति रिपोर्ट समय से प्रस्तुत करने को कहा है।
1.80 करोड़ पौधरोपण, सबके सब हरे
‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है’। शायर अदम गोंडवी का ये शेर चित्रकूटधाम मंडल में वन विभाग पर भी खरा साबित होता है। यहां की धरती भले ही वन नीति मानक से कोसों दूर और पेड़ पौधों से वीरान हो, पर वन विभाग की फाइलों में सब हरा ही हरा है। वन विभाग द्वारा पिछले माह सितंबर में सामाजिक वनीकरण के जो आंकड़े पेश किए हैं उसमें चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में रोपे गए 1,80,02,379 पौधे शत प्रतिशत जीवित बताए गए हैं।
इनकी जीओ टैगिंग का भी दावा किया गया है। ताजे आंकड़ों के मुताबिक बांदा में 2398 एकड़ में 10,68,100 पौधे रोपे गए हैं। चित्रकूट में 12,888 एकड़ में 59,03,572 पौधे रोप गए हैं। हमीरपुर में 17,092 एकड़ में 55,33,218 पौधे रोपे गए। महोबा में 6160 एकड़ में 54,97,489 पौध लगाए गए हैं। वन विभाग ने चारों जनपदों के सभी पौधों को जीवित बताया है।
बुंदेलखंड में वन क्षेत्र प्रतिशत में
बांदा 1.21
चित्रकूट 18.5
हमीरपुर 3.6
महोबा 4.50
जालौन 5.6
झांसी 6.66
ललितपुर 7.8
हरियाली के नाम पर खाओ-कमाओ का खेल
बुंदेलखंड में पौध रोपण पर हुए घोटालों का मुद्दा हाईकोर्ट तक पहुंचा चुके आरटीआई कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि पौध रोपण और हरियाली के नाम पर खाओ-कमाओ का खेल हो रहा है। करोड़ों रुपये खर्च हो जाने के बाद भी वन क्षेत्र जहां का तहां है। पौध रोपण में विश्व रिकार्ड बनाने का नाटकीय अभियान हो चुका है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में यह प्रकरण लंबित है। हरियाली के नाम पर सरकारी धन हड़पने वालों पर कार्रवाई की पूरी उम्मीद है।
वन संरक्षक ने जताई अनभिज्ञता
चित्रकूटधाम मंडल के वन संरक्षक नरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि एनएएफसीसी योजना में कोई घपला नहीं हुआ है। न ही किसी तरह की जांच की उन्हें जानकारी है।