बांदा। पहले सूखा, फिर बाढ़ और अब बारिश से खरीफ की फसल चौपट हो रही है। सितंबर में दो दिनों से लगातार हो रही रिमझिम बारिश धान के लिए मुफीद है, पर दलहन और तिलहन की फसलों सहित सब्जियों के लिए नुकसानदायक है।
खेत में मूंग, उर्द, तिल की फसल तैयार खड़ी है, लेकिन किसान लगातार हो रही बारिश से फसल काटने व माड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उधर, बारियों में लगी सब्जियों के पौधों के फूल जमीन में गिरने से उत्पादन पर 50 फीसदी असर पड़ सकता है। हालांकि बारिश से मौसम खुशगवार होने से लोगों ने उमस से राहत महसूस की है।
चित्रकूटधाम मंडल में इस वर्ष खरीफ की बुआई और धान की रोपाई के लिए 4,35,504 हेक्टेयर का लक्ष्य था। जुलाई में बारिश न होने से किसान खरीफ बुआई व धान की रोपाई नहीं कर पाए। 15 अगस्त से बारिश शुरू हुई तो किसानों ने किसी प्रकार 3,99,868 हेक्टेयर में अरहर, उर्द, मूंगफली, मूंग, ज्वार, बाजरा आदि की बुआई सहित धान की रोपाई की।
दो दिनों से हो रही रिमझिम बारिश से खरीफ की फसल को नुकसान पहुंच रहा है। किसानों का कहना है कि यदि मूंग, उर्द, तिल काट लिया तो धूप न निकलने से सड़ जाएंगे। कमोवेश यही स्थिति सब्जियों की है। किसानों का कहना है कि बारिश से पौधों में निकलने वाले फूल जमीन में गिर जाते हैं। इससे पौधों में फल नहीं लग पा रहे हैं। जल भराव से पालक, धनिया, तरोई, लौकी, करैला आदि पौध चौपट हो रहे हैं। मौसम साफ नहीं हुआ तो उत्पादन पर 50 फीसदी से अधिक का नुकसान होगा। हालांकि धान की फसल को कोई नुकसान नहीं है।
मंडल में खरीफ की स्थिति (हेक्टेयर में)
जिला लक्ष्य पूर्ति
बांदा 1,37,997 1,33,316
हमीरपुर 1,08,922 1,08,006
महोबा 1,22,925 94,472
चित्रकूट 65,660 64,074
योग 4,35,504 3,99,868
2019 में हुई सर्वाधिक 307 मिमी बारिश
बांदा। गुरुवार को जिले में लगभग आठ मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है, जबकि पिछले 15 दिनों में 101 मिमी बारिश हुई है। जो सितंबर माह की औसत बारिश 157.10 मिमी से 56 मिमी कम है, जबकि पिछले वर्ष सितंबर में 99.93 मिमी हुई थी। इसके पहले वर्ष 2019 में 307 मिमी बारिश हुई थी।
पूरे सितंबर बारिश के आसार
बांदा। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक दिनेश शाहा का कहना है कि मानसून देर से आने के कारण पूरे सितंबर में बारिश के आसार हैं। किसानों को पहले ही चेताया गया था कि वह कम पानी वाली फसलों को बोएं।
सितंबर में दलहन और तिलहन की फसलों के कटने का समय है। ऐसे में बारिश से इन फसलों की फलियां भीग जाएंगी और धूप निकलने पर फलियां फूटने से फल जमीन में गिर जाएगा, जबकि धान की फसल को फायदा है। -विजय कुमार, उप कृषि निदेशक, बांदा।