पन्ना टाइगर रिजर्व में यूरेशियन ग्रिफिंग गिद्ध को रेडियो टैग पहनाती देहरादून की टीम। संवाद
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करतल (बांदा)। बुंदेलखंड के मशहूर और इकलौते पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की टैगिंग के बाद अब गिद्धों की टैगिंग का काम शुरू हो गया है। यह रिजर्व पार्क गिद्धों के प्रवास के लिए भी मशहूर है। फिलहाल 25 गिद्धों की रेडियो टैगिंग की जाएगी। शुक्रवार को यूरेशियन ग्रिफिन और हिमालयन ग्रिफिन प्रजाति के दुर्लभ छह गिद्धों की रेडियो टैगिंग की गई है। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन का कहना है कि यह देश में प्रवासी गिद्धों की पहली रेडियो टैगिंग है।
पन्ना टाइगर रिजर्व विश्व की कई दुर्लभ प्रजातियों के गिद्धों का भी अड्डा है। मुख्य रूप से गिद्धों की पाई जाने वाली सात प्रजातियों में चार प्रजातियां पन्ना टाइगर में मौजूद हैं। रोजाना बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटकों के लिए यह विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इन गिद्धों के रहन-सहन और आने-जाने वाले मार्गों का पता करने तथा उन पर नजर रखने के लिए इन्हें रेडियो टैगिंग से लैस किया जा रहा है।
भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून के सहयोग से टीम ने गिद्धों की रेडियो टैगिंग शुरू कर दी है। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि अभी 25 गिद्धों का रेडियो टैगिंग किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार से अनुमति मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि रेडियो टैगिंग के बाद गिद्धों के रहवास, प्रवास के मार्ग और पन्ना लैंड स्केप में उनकी उपस्थिति आदि की जानकारी मिलती रहेगी। जिससे भविष्य में इनके प्रबंधन में आसानी होगी।
क्षेत्र संचालक ने बताया कि पूर्व में रिजर्व पार्क में तीन गिद्धों की रेडियो टैगिंग की गई थी। इनमें एक रेड हेडेड (लाल सिर) और दो गिद्ध इंडियन हैं। अब करीब एक वर्ष की कोशिशों के बाद बुधवार (9 फरवरी) को शाम पन्ना टाइगर क्षेत्र के गहरी घाट झालर घास मैदान में यूरेशियन ग्रिफिन गिद्ध टीम के हाथ आए। इनकी रेडियो टैगिंग की गई। संचालक ने बताया कि संभवत: देश में प्रवासी गिद्धों की यह पहली रेडियो टैगिंग है।
7.820 किलो का गिद्ध, 90 ग्राम का रेडियो टैग
करतल। रेडियो टैगिंग से लैस किए गए यूरेशियन ग्रिफिन गिद्ध का वजन 7.820 किलोग्राम है। पन्ना टाइगर संचालक ने बताया कि पहनाए जा रहे रेडियो टैगिंग का वजन सोलर चार्जर समेत कुल 90 ग्राम है। रेडियो टैगिंग के बाद गिद्ध को झालर मैदान में ही छोड़ दिया गया। इसके बाद शुक्रवार को 11 फरवरी को इसी मैदान में ही 5 और गिद्धों की रेडियो टैगिंग की गई। इसमें एक हिमालयन ग्रिफिंग गिद्ध है। यह प्रवासी गिद्ध है। अन्य चार गिद्ध रेड हेडेड हैं। टैगिंग के समय क्षेत्र संचालक सहित वन्य जीव संस्थान देहरादून के पक्षी विशेषज्ञ और रिजर्व पार्क के कर्मचारी मौजूद रहे।