बांदा। महंगाई के बीच रक्षाबंधन पर्व नजदीक आते ही राखियों से सजे बाजार गुलजार हो गए हैं। हालांकि, अबकी बाजार से चाइनीज राखियां गायब हैं। स्वदेशी राखियों की धूम है। पर्यावरण संदेश देने वाली राखियां भी लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।
पंद्रह रुपये से लेकर 150 रुपये कीमत तक की राखियां बाजार में बिक रही हैं। पिछले वर्ष से अबकी राखियों में लगभग 40 से 50 फीसदी तक कीमत में वृद्धि बताई गई है। रक्षाबंधन 22 अगस्त (रविवार) को है।
शहर के महेश्वरी चौराहा से लेकर चौक बाजार, छोटी बाजार, कालूकुआं, क्योटरा आदि इलाकों में बड़ी संख्या में राखियों की दुकानें सज गई हैं। सभी दुकानों में स्वदेशी रक्षा सूत्र और राखियों की भरमार है। अबकी चाइनीज राखियां लगभग पूरी तरह बाजार से गायब हैं।
महिलाओं को क्रिस्टल, स्वास्तिक, ओम और गणेश मूर्ति वाली राखियां समेत रंग-बिरंगे रक्षा सूत्र पसंद कर रही हैं। बच्चों के लिए टैडीवियर, डोरेमान, हीमैन, छोटा भीम, मोटू-पतलू, शेर-चीता, हाथी आदि चित्र वाले मंहगी राखियां उपलब्ध हैं।
राखी विक्रेता प्रभात कुमार, केदार गुप्ता, मनोज नगरिया आदि ने बताया कि ज्यादातर 15 से 40 रुपये कीमत तक की राखियां बिक रही हैं। महंगाई के चलते महंगी राखियां लोगों को कम पसंद आ रही हैं। कोरोना संक्रमण का भी कारोबार में असर नजर आ रहा है।
दुकानदारों के मुताबिक, अबकी लगभग 30 से 40 फीसदी राखियां महंगी हैं। 10 रुपये कीमत की राखी 14 से 15 रुपये की हैं।
20 फीसदी बढ़ी चांदी की राखी की मांग
अबकी रक्षाबंधन में चांदी की राखियों की मांग भी बढ़ी है। आकर्षक डिजाइन के ब्रेसलेट की मांग ज्यादा है। चांदी की राखियों की कीमत 600 से लेकर 900 रुपये तक है। सराफा व्यवसायी अनिल गुप्ता, सुनील गुप्ता, संदीप अग्रवाल, मनु गोयल आदि ने बताया कि इस वर्ष रक्षाबंधन में लगभग 20 प्रतिशत बाजार बढ़ा है। नक्काशीदार ब्रेसलेट ज्यादा पसंद आ रहे हैं। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष 10 फीसदी महंगी राखियां हैं।