बांदा। प्राकृतिक खेती के लिए राष्ट्रीय गठबंधन (एनसीएनएफ) ने उत्तर प्रदेश में भी दस्तक दी है। शुरुआत बुंदेलखंड से की है। पहली बैठक में चार महीनों के लिए साझा कार्यक्रम निर्धारित कर इसे जारी किया है। इसमें लगभग 20 संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।
एनसीएनएफ को राष्ट्रीय स्तर का गठबंधन बताया है। यह राज्य सरकारों के साथ प्राकृतिक/जैविक खेती पर काम कर रहा है। देश के अन्य राज्यों में सक्रिय गठबंधन ने अब यूपी में शुरुआत की है। बुधवार की शाम उत्तर प्रदेश कृषक समृद्धि आयोग के सदस्य प्रेमसिंह के बड़ोखर खुर्द गांव स्थित ह्यूमन एग्रेरियन सेंटर/कृषि फार्म में राष्ट्रीय गठबंधन की यूपी में पहली बैठक हुई। इसमें 20 से अधिक संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।
स्वाति (आंध्र प्रदेश) ने अपने राज्य में प्राकृतिक खेती और वहां की राज्य सरकार और संस्थाओं द्वारा चलाई जा रही साझा योजनाएं बताईं। कहा कि विश्व में प्राकृतिक खेती के लिए यह सबसे बड़ा कार्यक्रम है। प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को सक्षम बनाने पर जोर दिया।
कहा कि जैव इनपुट संसाधन केंद्र के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर कीटनाशकों और रासायनिक खादों के विकल्पों को बड़े पैमाने पर बनाया जा सकता है। अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अनुभव और सुझाव साझा किए। प्राकृतिक खेती में आने वाली चुनौतियां और यूपी में इसे आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर भी मंथन हुआ। मेजबान प्रेम सिंह ने आभार जताया।
प्राकृतिक खेती के घोषित साझा कार्यक्रम
1. प्राकृतिक खेती के वातावरण तैयार करना।
2. प्राकृतिक खेती पर काम करने वाली संस्थाओं को आपस में जोड़ना।
3. एक महीने के अंदर साझी समझ विकसित करने के लिए चार दिवसीय शिविर आयोजन।
4. फंड के लिए नेटवर्किंग तैयार करना।
बैठक में शामिल संस्थाएं
श्रमिक भारतीय (कानपुर), हर्तिका (छतरपुर), आगा खां फाउंडेशन (बहराइच), नवभारत कल्याण समिति (मुरादाबाद), सर सईद ट्रस्ट (अयोध्या), युवा कौशल विकास मंडल (हमीरपुर), वनवासी सेवाश्रम (सोनभद्र), विद्याधाम समिति (बांदा), परमार्थ सेवा संस्थान (बांदा), अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान (चित्रकूट), जीवा फाउंडेशन (बांदा), ग्रामोन्नति संस्था (महोबा), डीएस फाउंडेशन (छतरपुर) सहित सृजन, अरुणोदय संस्था, प्रगतिशील बाल विकास संस्थान, संपीपुर नेचर फार्मिंग, महिला एवं बाल कल्याण संस्था आदि।