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नेत्रहीन मां-बाप संग मासूम मांग रहे भीख

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बांदा। नेत्रहीन दंपती संग उनकी मासूम संतानें भी फुटपाथ पर भीख मांग रही हैं। बचपन से ही लोगों के आगे हाथ फैलाना उनका शौक या खेल नहीं बल्कि मजबूरी है। मासूमों और उनके नेत्रहीन माता-पिता को फुटपाथ पर इस हालत में रोजाना यहां से गुजरने वाले जनप्रतिनिधि, नेता और अफसर देखकर आगे बढ़ जाते हैं।
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कांशीराम कालोनी हरदौली घाट में लगभग 50 वर्षीय रंजीत और उसकी पत्नी रहते हैं। दोनों ही नेत्रहीन हैं। इनके तीन मासूम बच्चे हैं। रंजीत की पत्नी को मात्र 500 रुपये पेंशन मिलती हैं। पांच सदस्यीय परिवार के लिए यह नाकाफी है। मजबूरन पूरा परिवार रोजाना रेलवे ओवरब्रिज पर बैठकर भीख मांगता है।
मां-बाप को हाथ फैलाते देख उनकी गोद में बैठी दुधमुंही बच्ची भी आने-जाने वालों के सामने हाथ फैला देती है। इसी तरह रोजाना इस गरीब और मुसीबत के मारे परिवार के दिन बीत रहे हैं। रंजीत को पेंशन नहीं बंधी है। जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और अधिकारी भी बेखबर हैं।
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उधर, पालिकाध्यक्ष मोहन साहू ने नेत्रहीन दंपती और उनके मासूम बच्चों की मदद को अपने हाथ बढ़ाए हैं। कहा कि वह खुद अपनी जेब से मदद करेंगे और एक हजार रुपये की सरकारी मदद के लिए परिवार का खाता खुलवाएंगे।
अध्यक्ष ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर सरकारी योजनाओं का लाभ और मासूमों की सुरक्षा का अनुरोध किया है। उधर, समाजसेवी आशीष सागर दीक्षित ने कहा है कि मंडल मुख्यालय में गरीबों की यह अनदेखी चिंताजनक है।
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