बांदा। हिंदी हैं हम ऐसा मंच है जहां हरेक को अपनी मेधा और सामर्थ्य समृद्ध करने के साथ इसे निखारने का मौका मिलता है। अपनी पहचान बनाने का भी यह एक खास मंच है।
उपरोक्त तर्क मेधावी छात्र-छात्राओं ने अमर उजाला के तत्वावधान में राजकीय हाईस्कूल, बड़ोखर बुजुर्ग में हिंदी हैं हम कार्यक्रम के तहत आयोजित गोष्ठी और स्लोगन, पोस्टर तथा निबंध प्रतियोगिताओं में व्यक्त किए। तीनों प्रतियोगिओं के प्रथम, द्वितीय व तृतीय प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान पाने वाले छात्र भोला प्रसाद ने कहा कि भाषा हमारी संस्कृति का वाहक होती है।
हिंदी हमारी मातृ भाषा, राज्य भाषा और राष्ट्र भाषा है। पोस्टर प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान पाने वाले छात्रा पिंकी ने कहा कि हिंदी राष्ट्र के बहुसंख्यक लोगों द्वारा बोली और समझी जाती है। इसकी लिपि देवनागरी वैज्ञानिक है।
तृतीय स्थान पर रहीं छात्रा वंदना ने कहा कि हिंदी में आत्मसात करने की प्रवृत्ति है। भारत में यह भावनात्मक एकता स्थापित करने का प्रबल सामर्थ है। स्लोगन और निबंध में द्वितीय स्थान पर रहे छात्र प्रद्युम्न सिंह ने कहा कि हिंदी भारत की अस्मिता है।
इसे राजभाषा के रूप में वास्तविक रूप से स्थापित किया जाना चाहिए। निबंध प्रतियोगिता तृतीय स्थान हासिल करने वाली छात्रा सपना ने कहा कि भारत की अन्य स्थानीय भाषाएं हिंदी की अनुजा बनकर अपना दायित्व निभाती रहेगी। सभी छात्र-छात्राओं ने अमर उजाला के हिंदी हैं हम मिशन की सराहना की।
पोस्टर प्रतियोगिता : भोला प्रसाद प्रथम, पिंकी द्वितीय और वंदना तृतीय।
स्लोगन लेखन : भोला प्रसाद प्रथम, प्रद्युम्न सिंह द्वितीय, वंदना तृतीय।
निबंध लेखन : भोला प्रसाद प्रथम, प्रद्युम्न सिंह द्वितीय, सपना तृतीय।
निज भाषा उन्नति अहैं, सब उन्नति को मूल
प्रधानाचार्य डा. शशि मिश्रा ने प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को शाबासी देते हुए कहा कि हिंदी का प्रयोग मौलिक चिंतन और बच्चों को समझने की शक्ति का विकास करता है। मातृ भाषा में ही अपने कार्य करके गर्व महसूस करें। डा. मिश्रा ने भारतेंदु हरिश्चंद्र का यह कथन दोहराया, निज भाषा उन्नति अहैं, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटै न हिथ को शूल। प्रतियोगिताओं में कालेज की मानसी, नीलम सहित सलमान, अमित कुमार आदि ने भी प्रतिभाग किया।