बांदा। जिला खनिज न्यास निधि के अरबों रुपये अब गिनेचुने चंद अफसर खर्च नहीं कर पाएंगे। अब इसमें केवल और केवल माननीयों की ही मर्जी चलेगी। सांसद और विधायक भी न्यास के सदस्य बना दिए गए हैं।
प्रदेश मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने सोमवार को उत्तर प्रदेश जिला खनिज फाउंडेशन न्यास में दूसरा संशोधन पारित करके इसका रास्ता भी साफ कर दिया है। बुंदेलखंड के पांच जिलों बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर और जालौन में में एक अरब 40 करोड़ रुपये खनिज निधि के खजाने में जमा है। खदानों के पट्टे/नीलामी में मिलने वाले राजस्व का 10 फीसदी पैसा इस न्यास में जमा होता है।
कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए प्रस्ताव के मुताबिक, खान मंत्रालय भारत सरकार द्वारा खनिज न्यास की प्रबंध समिति और शासी परिषद में संसद सदस्य (लोकसभा व राज्य सभा) और विधायक (विधान सभा व विधान परिषद) को नामित किए जाने के लिए राज्य सरकार को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कैबिनेट ने केंद्र सरकार के इस निर्देश का हवाला देकर न्यास नियमावली-2017 के नियम-4 में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब न्यास में उपलब्ध धनराशि केंद्र और राज्य सरकारों की गाइडलाइन के मुताबिक खर्च की जाएगी। इसके लिए नियम-17 में भी कैबिनेट की बैठक में संशोधन किया गया है।
खनिज निधि खजाने में 1.40 अरब जमा
बुंदेलखंड में खनिज संपदा भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। सभी जनपदों में जिला खनिज फाउंडेशन न्यास (डीएमएफ) गठित है। बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर और जालौन में करीब 1.40 करोड़ रुपये न्यास के खाते में जमा हैं।
जिला खनिज न्यास में जमा राशि---
हमीरपुर- 55 करोड़
महोबा- 40 करोड़
बांदा- 20 करोड़
जालौन- 16 करोड़
चित्रकूट- 9 करोड़
योग 140 करोड़
डीएम अध्यक्ष, अफसर सदस्य
जिला खनिज न्यास फाउंडेशन निधि की शुरुआत अगस्त 2017 में हुई थी। शासन ने हरेक खनिज जनपद में गठित न्यास में एक शासी परिषद और एक प्रबंध समिति बनाई गई है। इन दोनों के पदेन अध्यक्ष डीएम हैं।
सदस्यों में डीएफओ, सीएमओ, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड, बीएसए और डीपीआरओ शामिल हैं। जिला खनिज अधिकारी सदस्य/सचिव हैं। दो गैर सरकारी पट्टाधारक सदस्य होते हैं। इन्हें डीएम नामित करते हैं।
इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। एडीएम, एसडीएम सदस्य और खनिज अधिकारी सदस्य/सचिव बनाए गए हैं।
खनिज न्यास निधि का खर्च
खनिज न्यास निधि का 60 फीसदी पैसा प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में खर्च होता है। खदानों के आसपास के गांवों आदि के विकास में लगाया जाता है।
यहां पेयजल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला बाल कल्याण, स्वच्छता आदि के कार्य शामिल हैं। निधि का 40 फीसदी फंड अन्य प्राथमिकता वाले कार्यों जैसे सिंचाई, भौतिक संरक्षण आदि में खर्च होता है। पट्टाधारक निधि में जो पैसा जमा करता है वह रायल्टी के अलावा है।
नियम है कि यह राशि रायल्टी के एक तिहाई से अधिक नहीं होगी। बैंक में जमा निधि राशि के खाते का संचालन खनिज अधिकारी और प्रबंध समिति के नामित सदस्य के संयुक्त हस्ताक्षरों से होता है।
बांदा में न्यास से 4.8 करोड़ रुपये जारी
चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय बांदा जनपद में जिला खनिज न्यास निधि में बीते चार वर्षों में अब तक 24 करोड़ 48 लाख 10 हजार 92 रुपये जमा हुए हैं। इसमें न्यास समिति अब तक चार करोड़ आठ लाख 85 हजार 442 रुपये कई विभागों को दे चुकी है।
आक्सीजन पाइप को 23.40 रुपये दिए
कोरोना संक्रमण काल में जिला खनिज न्यास निधि भी काम आई। मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आक्सीजन पाइपलाइन के लिए इसी वर्ष मार्च माह में खनिज निधि से 23 लाख 40 हजार रुपये दिए गए। इसी तरह नरैनी सीएचसी में आक्सीजन पाइपलाइन के लिए 45 लाख रुपये दिए गए हैं।
एचटी लाइन हटाने को 1.27 लाख रुपये
बड़ोखर खुर्द गांव में खनिज न्यास निधि के पैसे से हाईटेंशन लाइन हटाने के लिए एक लाख 27 हजार 911 रुपये दिए गए। इसके अलावा ब्याज वापसी में 11 लाख 83 हजार 553 रुपये दर्ज हुए हैं। यहां स्वयं सहायता समूह के प्रशिक्षण भवन के लिए 17 लाख रुपये निधि से दिए गए।
साल दर साल बढ़ा खनिज खजाना
खनिज न्यास निधि को खजाना दिन प्रतिदिन बढ़ता गया। स्थापना के समय अगस्त 2017 में बांदा में 2002 रुपये जमा हुए थे। अगले ही माह सितंबर में यह बढ़कर 25 लाख 11 हजार 422 रुपये हो गए।
अक्तूबर में 1.19 करोड़, नवंबर में 1.47 करोड़ से भी ज्यादा पैसा जमा हुआ। पिछले माह जुलाई 2021 में एक लाख 32 हजार रुपये जमा बताए गए, जबकि खनन के आखिरी माह जून 2021 में 31 लाख 20 हजार रुपये पट्टाधारकों ने जमा किए।