बांदा। फाइलेरिया मुक्त जनपद के लिए मंगलवार से महाभियान शुरू हो गया। 71 टीमों ने घर-घर जाकर डीईसी और एल्बेंडाजॉल की गोलियां खिलाईं। पहले दिन 71901 लोगों को दवा खिलाने का दावा किया गया है। लक्ष्य 21 लाख लोगों को दवा खिलाने का है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक प्रदेश में 9 से लेकर 21 फीसदी स्वस्थ लोगों को फाइलेरिया से ग्रस्त पाया गया है। उनमें माइक्रो फाइलेरिया कीटाणु मिले हैं। फाइलेरिया का कोई इलाज नहीं है।
प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरएन प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) अभियान में 71 टीमें लगाई गईं हैं। इनमें 2785 कर्मचारी और 306 सुपरवाइजर हैं। उन्होंने बताया कि परजीवी क्यूलेक्स फैंटीगंस मादा मच्छर से यह रोग फैलता है। यह मच्छर आसपास गंदे पानी के भराव से पनपते हैं। तेज बुखार, हाथ-पैर की नसों का फूलना, दर्द, जांघ में गिलटी, हाथ-पैर में सूजन आदि इसके लक्षण हैं।
उधर, मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती और गंभीर बीमारी वाले मरीजों को यह दवा नहीं देनी है। साथ ही खाली पेट भी यह गोलियां नहीं खानी चाहिए।