बांदा। नए कानूनों को लेकर पिछले आठ दिनों से चल रहा वकीलों का क्रमिक अनशन शनिवार को स्थगित कर दिया गया। इसके पूर्व अधिवक्ता संघ की बैठक में लड़ाई जारी रखते हुए पहली जुलाई को काला दिवस मनाने और खून से लिखा ज्ञापन राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को भेजने का निर्णय किया। आठ जुलाई के बाद देश व्यापी सम्मेलन बांदा में कराया जाएगा।
शनिवार को उच्च न्यायालय के पूर्व अध्यक्ष इंद्र कुमार चतुर्वेदी की मौजूदगी में बार संघ अध्यक्ष अशोक दीक्षित ने कहा कि बार कौंसिल ऑफ दिल्ली ने उन्हें पत्र लिखकर अवगत कराया है कि आठ तारीख को विभिन्न विधि विशेषज्ञों की बैठक बुलाई गई है। इसमें कमेटी का गठन किया जाएगा। कमेटी दो दिन के अंदर नए कानूनों में खामियों का अध्ययन करेगी।
कमेटी में सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र यादव रहेंगे। इसके बाद आंदोलन की रूप रेखा तय की जाएगी। इस बैठक में बांदा बार संघ को भी आमंत्रित किया गया है। ऐसे में अब अनशन का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने स्थगन की घोषणा करते हुए लड़ाई जारी रखने की बात कही।
इसके पूर्व बार संघ की बैठक में निर्णय लिया गया कि नए कानूनों के विरोध में पहली जुलाई को काला दिवस मनाया जाएगा। सभी वकील साथी काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही युवा साथी अपने खून से लिखा ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित कई विपक्षी दलों के प्रमुखों को भेजकर इस काले कानून को रद्द करने की मांग करेंगे।
महासचिव रामप्रकाश शिवहरे ने कहा कि नए कानून के विरोध की ज्वाला पश्चिम बंगाल से लेकर अंडमान निकोबार समेत पूरे देश में जल रही है। आठ जुलाई को बार कौसिंल ऑफ नई दिल्ली की बैठक के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। दो जुलाई से हड़ताल भी स्थगित रहेंगी।
पूर्व बार संघ अध्यक्ष शंकर सिंह, अशोक त्रिपाठी जीतू, शिवनायक सिंह, एजाज अहमद, अवधेश गुप्ता, रामकृष्ण, कालिका प्रसाद, ब्रजेश द्विवेदी, राममिलन पटेल आदि मौजूद रहे।