Even after spending lakhs, the appearance of the pond did not change
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अतर्रा (बांदा)। सिद्ध पीठ गौराबाबा धाम मंदिर स्थित घुम्मा तालाब की सूरत लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नहीं बदली है। नालों को जोड़ दिए जाने से इसका पानी भी दूषित हो गया है। तालाब के चारों ओर गंदगी का अंबार है।
लोगों ने आरोप लगाया कि जीर्णोद्धार के नाम पर तालाब की लाखों रुपये की मिट्टी बेच ली गई। कमोवेश यही स्थिति कस्बे के अन्य तालाबों की भी है। रख-रखाव के अभाव में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट व शासन के सख्त आदेशों के बाद भी तालाबों के भीटो से अतिक्रमण नहीं हटाया गया। भीटों पर बड़े-बड़े मकान बने हैं और बन रहे हैं। अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
पिछले दिनों नरैनी विधायक ने तहसील क्षेत्र के अतिक्रमण के शिकार नौ प्राचीन तालाबों की सूची देकर कार्रवाई के लिए कहा था। भाजपा जिला उपाध्यक्ष दिनेश गुप्ता, साकेत बिहारी मिश्रा, सूरज बाजपेयी, बृजेश द्विवेदी, राकेश गौतम, शिव गोपाल, हरिहर मिश्रा ने शासन प्रशासन को पत्र भेजकर ऐतिहासिक तालाबों का जीर्णोद्धार कराने की मांग की है।