बांदा/करतल। मध्य प्रदेश की सीमा से सटे पन्ना जिले में स्थित बुंदेलखंड के पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में दो वर्ष के युवा बाघ का बिजली का करंट लगाकर शिकार किया गया। बाघ का खाल निकालकर शव तालाब में फेंक दिया गया। कई दिनों बाद बाघ का कालर रेडियो जंगल में पड़ा मिलने पर पार्क प्रबंधन को इसकी जानकारी हुई। दुर्लभ बाघ के शिकार से पार्क प्रबंधन में हड़कंप मचा है। वहीं, पार्क प्रबंधन से जुड़े अधिकारी तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रहे हैं।
पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में संरक्षित बाघ पी-243(31) का कॉलर रेडियो सीमावर्ती सतना जिले के सिंहपुर वन रेंज की आमदरी बीट में पड़ा मिला। इसी के बाद पार्क प्रबंधन ने बाघ की खोज शुरू कर दी। कुछ ही घंटों की तलाश के बाद बाघ का शव सतना जिले की सीमा में स्थित तालाब में मिला, उसकी खाल उतरी हुई थी। सूत्रों के मुताबिक बाघ का शिकार जंगल में करंट लगाकर किया गया। दो वर्षीय इस बाघ का जुड़वां भाई भी है। रिजर्व पार्क में यह दोनों हीरा और पन्ना के नाम से पुकारे जाते थे।
बाघ का शव जहां मिला है, वह सतना वन मंडल की बरौंधा रेंज से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित है। सूचना मिलते ही पार्क प्रबंधन और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। वन मंडल अधिकारी विपिन कुमार पटेल ने बताया कि तीन संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है। माना जा रहा है कि बाघ का शिकार दशहरा के आसपास किया गया है। बाघ रेडियो कॉलर पहने हुए था। इसके बाद भी पार्क प्रबंधन और वन विभाग को भनक नहीं लगी। बताया गया है कि यह बाघ तीन महीने पहले नए ठिकाने की तलाश में पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला बफर से सतना जिले के जंगल में चला गया था। वहीं उसका शिकार हो गया।
उधर, पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के क्षेत्रीय निदेशक उत्तम कुमार शर्मा का कहना है कि पार्क में बाघों के संरक्षण और सुरक्षा पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। रेडियो कॉलर और कैमरों से उन पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान केंद्रीय वन मंत्रालय ने बाघों की सुरक्षा को लेकर गाइड लाइन जारी की थी। इस पर पूरा अमल हो रहा है। सभी शावक और बाघ स्वस्थ और सुरक्षित हैं।