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गोशालाएं वीरान, मवेशी सड़कों पर

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तिंदवारी। सरकार अन्ना मवेशियों के संरक्षण के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहा रही है। इसके बावजूद सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में अन्ना मवेशी मंडरा रहे है। हाईवे से लेकर खेतों तक में छुट्टा मवेशियों की धमाचौकड़ी है। हाईवे पर मवेशियों की जान के साथ राहगीर भी मौत के आगोश में समा रहे हैं।
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फसलों को बचाने के लिए किसान बारिश के मौसम में खेत में दिन-रात डेरा डाले हैं। बांदा-टांडा नेशनल हाईवे किनारे बसे गांव महोखर, कुरसेजा, सैमरी, मूंगुस, छापर, जसईपुर, माटा आदि में गोशालाएं महज कागजों में चल रही हैं।
यहां एक भी मवेशी नहीं हैं। अन्ना मवेशी शाम से हाईवे पर डेरा जमा लेते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रतिदिन हाईवे पर अन्ना मवेशी मर भी रहे हैं। जिनके शवों को कुत्ते नोंच रहे हैं। दुर्गंध से आसपास के गांवों के लोग घरों में नहीं रह पा रहे हैं। हाईवे से निकलना मुश्किल हो गया है।
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पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त दिनेश कुमार सिंह ने सड़कों में घूम रहे अन्ना मवेशियों को गोशालाओं में संरक्षित करने के आदेश दिए थे, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। उधर, अन्ना मवेशियों से फसलों के बर्बाद होने से किसान खासे परेशान हैं।
मवेशियों का झुंड जिस खेत में घुसता है, उसे बर्बाद कर देता है। किसान दिन-रात रखवाली के बाद भी फसलों को नहीं बचा पा रहे हैं। एडीएम संतोष बहादुर सिंह का कहना है कि बारिश के कारण जानवरों को गोशालाओं में नहीं रखा जा रहा है। बारिश बंद होते ही इन्हें संरक्षित किया जाएगा।
छुट्टा पशुओं को गोशालाओं में कैद किया जाए
खत्री पहाड़। अन्ना मवेशी रात में सड़कों के किनारे बैठे रहते हैं, जिससे आए दिन दुघर्टनाएं हो रही हैं। सुबह मवेशी खेतों की तरफ चले जाते हैं। जिस खेत में घुसते हैं, उसे सफाचट कर देते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नवरात्र को यहां विंध्यवासिनी मंदिर में विशाल मेला लगता है। सात अक्तूबर को दूर-दूर से लोग यहां दर्शन को आते हैं। देवी जी, गिरवां, पैगंबरपुर की सड़कों में बैठे अन्ना मवेशी उनके लिए काल साबित हो सकते हैं।
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ग्रामीणों ने डीएम से अन्ना मवेशियों को गोशालाओं में बंद कराने की मांग की, ताकि सड़क दुर्घटनाओं के साथ-साथ किसान की फसलें बच सकें।
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