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केन-बेतवा परियोजना के लिए गठित होगा केंद्रीय प्राधिकरण

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Central authority to be set up for Ken-Betwa project - फोटो : BANDA
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बांदा। डेढ़ दशक से प्रक्रियाओं में उलझी केन-बेतवा लिंक परियोजना पर फिर तेजी आई है। केंद्र, यूपी और एमपी के जल संसाधन मंत्रियों की भोपाल में हुई वर्चुअल बैठक में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि परियोजना के लिए केंद्रीय प्राधिकरण का गठन होगा।
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प्राधिकरण पानी और उत्पादित बिजली के यूपी और एमपी के बीच बंटवारे के लिए काम करेगा। उन्होंने दोनों राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों को दो दिन में अपनी कार्ययोजना केंद्र को भेजने के निर्देश दिए। परियोजना पर काम की शुरुआत मध्य प्रदेश से होगी।
बहुप्रतीक्षित केन-बेतवा लिंक परियोजना अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में स्वीकृत हुई थी। शुरुआती लागत 35 हजार 111 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसमें केंद्र सरकार 60 फीसदी और यूपी और एमपी 20-20 फीसदी खर्च करेंगे। परियोजना में दोनों ही राज्यों की पानी की हिस्सेदारी है।
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हालांकि उत्तर प्रदेश अपने हिस्से में पानी ज्यादा मांग रहा है। मध्य प्रदेश इसके लिए तैयार नहीं है। इस मुद्दे पर पूर्व में दोनों राज्यों के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। बुधवार को भोपाल में हुई वर्चुअल बैठक में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश के मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह तथा मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट शामिल हुए। इनके अलावा मंत्रालय और मध्य प्रदेश जल संसाधन मंत्रालय के सचिव और उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव शामिल हुए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर दोनों राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ यह बैठक की जा रही है। परियोजना के लिए केंद्रीय प्राधिकरण का गठन होगा।
यह पानी और उत्पादित बिजली के बटवारे के लिए काम करेगा। उन्होंने दोनों राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों को दो दिन में अपनी कार्ययोजना केंद्र को भेजने के निर्देश दिए। बैठक में डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पर भी चर्चा हुई।
2005 में हुआ था केन-बेतवा लिंक एमओयू
बांदा। केन बेतवा लिंक परियोजना का एमओयू अगस्त 2005 में हुआ था। परियोजना में मध्य प्रदेश की 6.53 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इसमें केन बेसिन में 4.47 लाख हेक्टेयर एमपी का और 2.27 लाख हेक्टेयर यूपी का कृषि योग्य सिंचित क्षेत्र लाभान्वित होना बताया गया है।
बेतवा नदी बेसिन से एमपी के 2.6 लाख हेक्टेयर को लाभ मिलेगा। एमओयू के तहत इस परियोजना से पैदा होने वाली बिजली का संपूर्ण प्रयोग एमपी करेगा। दोनों राज्यों में पानी आवंटन को लेकर सहमति नजर आई, लेकिन अब उत्तर प्रदेश ने अपनी पानी की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की है।
बुंदेलखंड में जल संरक्षण पर कार्य कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से दोनों राज्यों को पर्यावरण में भारी नुकसान पहुंचेगा। जनजीवन, जंगल और वन्य जीव प्रभावित होंगे। लगभग 7 लाख बड़े पेड़ कटेंगे। 10 आदिवासी गांव उजाड़े जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट पर केंद्र सरकार से पर्यावरण एनओसी देने पर सवाल उठाए थे। यूपीए सरकार के तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री रमेश ने पन्ना टाइगर्स रिजर्व की बायोडायवर्सिटी/ईको सिस्टम से छेड़छाड़ और सात लाख बड़े पेड़ों की कटान होने पर पर्यावरण एनओसी नहीं दी थी। आशीष ने कहा कि मोदी सरकार का भले ही यह ड्रीम प्रोजेक्ट हो लेकिन बुंदेलखंड के पर्यावरण कार्यकर्ताओं और भौगोलिक विशेषज्ञों के गले नहीं उतर रही।

Central authority to be set up for Ken-Betwa project- फोटो : BANDA

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