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बकस्वाहा की हरियाली खून से सींचेंगे

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बांदा। बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल की हरियाली पर्यावरण प्रेमी खून से भी सींचने को तैयार हैं। लाखों पेड़ बचाने के लिए पर्यावरण पैरोकार अपना रक्त दे रहे हैं।
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बकस्वाहा जंगल बचाओ अभियान में लगे अनुराग विश्नोई (रूपनगर, पंजाब) ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपने खून से लिखा पत्र भेजा है। विश्नोई ने कहा कि वह यह पत्र अपनी अंतरात्मा की आवाज से लिख रहे हैं।
महज चंद हीरों के लिए बकस्वाहा जंगल के 2 लाख से ज्यादा पेड़ काटने से रोका जाए। अगर यह पेड़ कट गए तो यहां की जैव विविधता खत्म हो जाएगी। पशु-पक्षी उजड़ जाएंगे। आदिवासी बेघर होंगे। यूं भी बुंदेलखंड हमेशा से सूखे की समस्या से जूझता आ रहा है।
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अगले माह नीलगिरी में मंथन शिविर
बकस्वाहा जंगल बचाने को पर्यावरण पैरोकारों की कोशिशें जारी हैं। रविवार को वर्चुअल मीटिंग में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। अनुराग विश्नोई ने बताया कि हाल ही में तीन दिवसीय अभियान हुए। इसमें कई राज्यों के लोग शरीक थे। सभी का आभार जताया गया।
अध्यक्षता पीपल, नीम, तुलसी अभियान संरक्षक डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने की। मातृ शक्ति सीमा चौहान सहित पूनम खन्ना, पिंकी ज्योति, पिंकी पांडेय, ऊषा, श्रद्धा चौहान, लीला पमार, काजल इंदौरी, संचित इंदौरी, राजेश यादव इत्यादि शामिल रहे। मीटिंग में तय हुआ कि अगले माह नीलगिरी में मंथन शिविर होगा।
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