बांदा। हड़ताल के चलते सरकारी एंबुलेंस सेवा ठप किए जाने से मरीजों की जान पर बन आई। बड़ी दुश्वारियों के साथ तीमारदार मरीजों को लेकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। निजी व प्राइवेट वाहन और ई-रिक्शा से मरीज अस्पताल लाए गए। पूरे जिले में ऐसे कई केस हैं।
उधर, जीवनदायनी स्वास्थ्य विभाग 108 व 102 (एंबुलेंस कर्मचारी संघ) बैनर तले जिले के लगभग दो सैकड़ा कर्मचारियों ने एंबुलेंस सेवा ठप कर प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि कोरोना काल में जान गंवाने वाले एंबुलेंस कर्मियों के आश्रितों को 50 लाख रुपये की मदद दी जाए।
तीन दिन पूर्व 108 व 102 एंबुलेंस कर्मियों ने नई कंपनी द्वारा मानदेय में कटौती न किए जाने, कर्मचारियों को न बदलने, प्रतिवर्ष महंगाई भत्ता, प्रशिक्षण के नाम पर डीडी न लेने, एनएचएम के अधीन किए जाने समेत कई मांगों का ज्ञापन दिया था।
चेतावनी दी थी कि मांगें पूरी न होने पर एंबुलेंस सेवा ठप कर दी जाएगी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने सुध नहीं ली। नतीजे में एंबुलेंस सेवा ठप कर सभी कर्मी रविवार की आधी रात से हड़ताल पर चले गए। पंडित जेएन डिग्री कालेज ग्राउंड में सभी 47 एंबुलेंस खड़ी कर दी गईं।
संगठन जिलाध्यक्ष जयेंद्र सिंह की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन किया। एंबुलेंस कर्मियों ने चेतावनी दी कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं हड़ताल जारी रहेगी। प्रदर्शन में सभी एंबुलेंस चालक और ईएमटी शामिल रहे।
केस-एक
मटौंध गांव के संतोष कुमार का दुर्घटना में पैर टूट गया था। सोमवार को तकलीफ ज्यादा होने पर परिजन उसे टेंपो में लेकर जिला अस्पताल आए। परिजनों ने बताया कि एंबुलेंस कर्मियों ने हड़ताल की बात कहकर फोन काट दिया था।
उधर, बिसंडा गांव निवासी 70 वर्षीय रामप्यारी की हालत बिगड़ने पर उसके घरवाले उसे प्राइवेट वाहन से जिला अस्पताल लाए। परिजनों का कहना है कि समय से अस्पताल पहुंचाने के लिए उन्हें दो हजार रुपये खर्च करना पड़े।
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केस-दो
छनेहरा लालपुर गांव की पिंकी ने बताया कि दो दिन पूर्व जिला महिला अस्पताल में शिशु हुआ। छुट्टी होने पर 102 एंबुलेंस को कॉल की। हड़ताल की बात कहकर काट दिया। बारिश का मौसम है और ऐसे में नवजात को खुला ले जाना ठीक नहीं है। ई-रिक्शा या अन्य साधन का इंतजार कर रही है।
इमर्जेंसी पर बहाल होंगी एंबुलेंस
बांदा। एंबुलेंस सेवा जिला कार्यक्रम प्रबंधक उमेश द्विवेदी ने बताया कि इमर्जेंसी सेवा में एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाएगी। मेडिकल कालेज, जिला अस्पताल समेत बबेरू, अतर्रा व नरैनी में एक-एक एंबुलेंस तैनात की गई है।
एंबुलेंस संघ जिलाध्यक्ष ने लिखित रूप से आश्वस्त किया कि इमर्जेंसी पर एंबुलेंस सेवा बहाल होगी। यहां से रोजाना 15 से 17 मरीज कानपुर, लखनऊ, झांसी, प्रयागराज के लिए एंबुलेंस से रेफर होते हैं। जिले में 108 की 23 व 102 की 21 और एएलएस की तीन एंबुलेंस हैं।
एंबुलेंस की हड़ताल से भटके मरीज
अतर्रा। समय से वेतन भुगतान और नए कर्मचारियों को भर्ती के विरोध में सोमवार को एंबुलेंस चालक हड़ताल पर रहे। सीएचसी में हड़ताल से मरीज व तीमारदार हलाकान रहे। प्राइवेट वाहनों की चांदी रही। सीएचसी, अतर्रा में तीन एंबुलेंस कार्यरत हैं। एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से पूरा दिन मरीज और तीमारदार परेशान रहे। 108 और 102 एंबुलेंस को फोन करने के बाद उन्हें इस सेवा का लाभ नहीं मिल सका।
तीमारदारों का फोन पहुंचने पर चालकों द्वारा यही जवाब दिया गया कि हड़ताल है। मरीज को निजी साधनों से ले जाओ। कमोवेश यह स्थित क्षेत्र के अन्य अस्पतालों की भी रही। उधर, सीएचसी प्रांगण में ई-रिक्शा चालकों ने हड़ताल का फायदा उठाकर मनमानी दाम वसूले।