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अधिवक्ता को सपरिवार मिली जमानत

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बांदा। पुलिस कर्मियों पर हमले के आरोप में गिरफ्तार कर जमकर पीटने के बाद लगभग 10 संगीन धाराओं में जेल भेजे गए अधिवक्ता और पत्नी, पुत्रों, पुत्री आदि 8 परिजनों को अदालत ने अगले ही दिन जमानत पर रिहा कर दिया। जिला अधिवक्ता संघ के नेतृत्व में अधिवक्ता इस मुद्दे पर पुलिस के खिलाफ एकजुट हैं और सोमवार व मंगलवार को दो दिन की हड़ताल पर हैं। उनकी मुख्य मांग है कि अधिवक्ता और परिवार को पीटने वाले पुलिस कर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए। इसके लिए गिरफ्तार अधिवक्ता की ओर से उसी दिन पुलिस को तहरीर दी जा चुकी है।
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बबेरू कोतवाली क्षेत्र के पड़री गांव में शुक्रवार को नोटिस तामील कराने गए पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट की गई थी। पुलिस ने अधिवक्ता केशव प्रसाद यादव और उनकी पत्नी, दो पुत्र, पुत्रवधू आदि सहित कुल 14 लोगों के विरुद्ध संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। आरोपियों को गिरफ्तार कर जमकर पीटा था। आरोपियों की अदालत में पेशी के दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने लामबंद होकर पुलिस का विरोध किया। अधिवक्ता संघ अध्यक्ष व महासचिव का कहना था कि अधिवक्ता केशव प्रसाद घटना के दिन बांदा में थे। उन्हें निर्दोष होते हुए पुलिस यहां से उठा ले गई। पुरुषों और महिलाओं के साथ बुरी तरह बर्बरता हुई। शनिवार को सभी गिरफ्तार आरोपियों का जिला अस्पताल में मेडिकल कराया गया। इसके बाद देर रात पुलिस ने जेल भेज दिया।
सोमवार को आरोपी अधिवक्ता और उनके गिरफ्तार परिजनों की जमानत अर्जी पर तृतीय अपर जिला सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) ने सुनवाई की। हड़ताल होने के बावजूद बड़ी संख्या में अधिवक्ता अपने साथी और उनके परिजनों की पैरवी के लिए अदालत में उपस्थित थे। इन अधिवक्ताओं ने पुलिस की तमाम दलीलों और आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश नूपुर ने अपने तीन पेज आदेश में आरोपी केशव प्रसाद, धनेश, देव प्रसाद, सुशील उर्फ सुनील, सावित्री, पूजा उर्फ सविता, कुमारी शिखा व कुमारी प्रभा की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। इन सभी को 20-20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंध पत्र तथा इतनी ही राशि के दो-दो प्रतिभूति दाखिल करने पर रिहा करने के आदेश दिए। देर शाम जेल अधीक्षक वीरेंद्र कुमार ने बताया कि रिहाई का आदेश प्राप्त हो गया है। रिहाई की प्रक्रिया की जा रही है।
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हाईकोर्ट तक पहुंची अधिवक्ता पर जुल्म की दास्तां
बांदा। अधिवक्ता केशव प्रसाद और उनके साथ पुलिस द्वारा किए गए जुल्म की कहानी इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रशासनिक जज तक पहुंच गई। अधिवक्ता संघ ने उन्हें पूरे प्रकरण से अवगत कराया। प्रशासनिक जज ने न्याय का भरोसा दिलाया।
प्रशासनिक राजेंद्र सिंह चौहान सोमवार को बांदा आए हुए थे। उन्होंने जिला एवं सत्र न्यायालय का मुआयना किया। जजी परिसर में पौधे लगाए। जिला जज सहित सभी न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे। इसी बीच जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष ब्रजमोहन सिंह और महासचिव राकेश कुमार सिंह के नेतृत्व में वकीलों के प्रतिनिधि मंडल ने उनसे मुलाकात की और अपने अधिवक्ता साथी केशव प्रसाद यादव और उनके परिवार के साथ पुलिस द्वारा किए गए जुल्म के बारे में बताया। उन्हें आई चोटों की मेडिकल रिपोर्ट आदि दिखाई। महासचिव ने बताया कि दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का प्रत्यावेदन भी प्रशासनिक न्यायाधीश को भेजा जा रहा है। प्रशासनिक न्यायाधीश ने अधिवक्ताओं को भरोसा दिलाया कि इस पर न्यायपूर्ण कार्रवाई होगी। (संवाद)
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