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गर्म तवा सी तपी धरती, आसमान से बरसी आग

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The earth scorched like a hot griddle, fire rained from the sky - फोटो : BANDA
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बांदा। हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट में बीते तीन चार दिन में तापमान 47 से 50 डिग्री तक पहुंच गया है। बुंदेलखंड की सूखी धरती गर्म तवा सी तप रही है। दोपहर में सूरज की तपिश इतनी तेज है, जैसे आसमान से आग बरस रही हो। इंसान के साथ ही पशु पक्षी बेहाल हैं। केंद्रीय जल आयोग ने रविवार को बांदा का तापमान 50.20 डिग्री होने का दावा किया है। आंकड़े बताते हैं कि इससे अधिक तापमान बुंदेलखंड के लोगों ने कभी नहीं झेला। हालांकि 23 वर्ष पूर्व 1999 में यहां 48 डिग्री के आसपास तापमान रह चुका है।
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भीषण गर्मी का सीधा असर बिजली आपूर्ति पर पड़ा है। बीते छह दिनों में चारों जिलों में करीब 80 मेगावाट बिजली की खपत बढ़ गई है। गर्मी और ओवरलोडिंग की वजह से ट्रांसफार्मर और उपकरणों धड़ाधड़ फुंक रहे हैं। तार गर्म होकर शार्ट हो रहे हैं। मंडल में रोजाना 500 मेगावाट बिजली खर्च हो रही है। सबसे ज्यादा 234 मेगावाट का लोड बांदा और हमीरपुर में है। महोबा में 154 व चित्रकूट में 100 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। पावर कारपोरेशन को निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक बिजली आपूर्ति में पसीने छूट रहे हैं। रात-दिन रोजाना हो रहे फाल्टों से शेड्यूल के मुताबिक आपूर्ति संभव नहीं हो पा रही।
पानी के लिए हायतौबा, टैंकर नाकाफी
बिजली गड़बड़ाई तो जलापूर्ति भी धड़ाम हो गई। इस बाधा से जल संस्थान के फीडर भी अछूते नहीं है। इन्हें 24 घंटे बिजली आपूर्ति की गाइड लाइन है, लेकिन फाल्टों की वजह से इन फीडरों को घंटों बिजली नहीं मिल पा रही। जल संस्थान के नलकूप और इंटेकवेल चल नहीं पा रहे। नतीजे में छह दिनों के अंदर सिर्फ बांदा शहर में नौ एमएलडी पानी और कम हो गया है। जल संस्थान के मानक के मुताबिक रोजाना 26 एमएलडी पानी आपूर्ति होना चाहिए। मगर हो रहा है सिर्फ 17 एमएलडी। ऐसे में शहर के अधिकतर इलाकों में पानी के लिए हायतोबा मची है। टैंकर नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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गांवों में 12 घंटे भी बिजली नहीं
चित्रकूट। पारा परवान चढ़ने के बाद एक हफ्ते के अंदर आधा दर्जन से ज्यादा ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। बिजली आपूर्ति 16 घंटे में सिमट गई है। गांवों का और बुरा हाल है। 125 गांव में 12 घंटे भी बिजली नहीं मिल रही। 25 गांवों में आठ घंटा ही आपूर्ति हो रही है। अधिशासी अभियंता रामस्वरूप वर्मा का कहना है कि तापमान से ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं और लाइनें टूट रही हैं। बिजली आपूर्ति बुरी तरह बाधित है। पाठा पेयजल योजना समेत अन्य जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. मनोज शर्मा ने बताया कि अभी कई दिन गर्मी का यह प्रकोप बरकरार रहेगा।
हफ्तेभर में फुंक गए 10 ट्रांसफार्मर
हमीरपुर। जिले में बीते माह 53.25 मेगावाट बिजली की मांग थी। मौजूदा गर्मी में यह बढ़कर 54 मेगावाट का आंकड़ा पार कर गई है। पावर कारपोरेशन ओवर लोडिंग से जूझ रहा है। एक हफ्ते के अंदर 10 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। हालांकि इन्हें 24 घंटे के अंदर बदला भी गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के 12 सब स्टेशनों के 20 फीडरों में 73 से 90 फीसदी तक लाइन लॉस हो रहा है। अधिशासी अभियंता सुमित व्यास का कहना है कि तापमान बढ़ने से बिजली की मांग काफी बढ़ गई है। फाल्ट भी ज्यादा हो रहे हैं। बिजली ने जलापूर्ति में बाधा खड़ी कर दी है। रमेड़ी, मेरापुर, केसरिया डेरा में रविवार को पानी के लाले रहे।
जलापूर्ति 20 से घटकर 10 एमएलडी हुई
महोबा। 90 मेगावाट की आपूर्ति तापमान बढ़ने के बाद 100 मेगावाट पहुंच गई है। फाल्ट और ट्रिपिंग से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कई-कई घंटे बिजली बंद हो रही है। एक हफ्ते में चार ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। इन्हें बदल दिया गया है। अधीक्षण अभियंता आरएस गौतम ने बताया कि फुंके ट्रांसफार्मरों की मरम्मत चरखारी स्थित वर्कशाप में चल रही है। जरूरत पर नए ट्रांसफार्मर भी उपलब्ध कराए जाते हैं। उधर, जल निगम के अधिशासी अभियंता (शहरी) मोहित वर्मा ने बताया कि पर्याप्त बिजली न मिलने से जलापूर्ति 20 एमएलडी से घटकर 10 एमएलडी हो गई है। जनपद में तापमान मापने का कोई यंत्र नहीं है। कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल के वैज्ञानिक डा. मुकेश चंद्र ने बताया कि अन्य सूत्रों से तापमान लिया जाता है।
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