बांदा/करतल। बुंदेलखंड के विश्व विख्यात पन्ना टाइगर रिजर्व में पहली बार पक्षी सर्वेक्षण कराया गया। बाघ और गिद्ध के लिए संरक्षित और मशहूर पन्ना टाइगर में सर्वेक्षण के दौरान 247 प्रजातियों के पक्षी पाए गए हैं। इनमें 21 प्रजातियां उन पक्षियों की हैं, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल कर चुका है।
बुंदेलखंड के पन्ना जनपद में पहाड़, नदियों और जंगल के बीच विंध्य पहाड़ियों में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व में पिछले माह गिद्धों की रेडियो टैगिंग शुरू की गई है। टीम को दुर्लभ प्रजाति के यूरेशियन ग्रिफिन और हिमालयन ग्रिफिन प्रजातियों के छह दुर्लभ गिद्ध भी मिले जिनकी टैगिंग की गई है।
अब पहली बार यहां पक्षियों का सर्वेक्षण कराया गया है। इसी माह चार से छह मार्च तक यह सर्वेक्षण मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक, मध्य प्रदेश के मार्ग दर्शन और मध्य प्रदेश जैव विविधिता बोर्ड के सहयोग से किया गया है। पन्ना टाइगर के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि पक्षी सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 450 आवेदन प्राप्त हुए थे।
इनमें 60 बर्ड वाचर्स का चुनाव कर उनकी 28 टीमें बनाई गईं थीं। हरेक टीम के साथ पार्क के गाइड भी थे। पार्क प्रबंधन ने टीमों को दूरबीन और पक्षी पुस्तक भेंट की थी। इन टीमों ने पन्ना टाइगर के सभी रेंजों में अलग-अलग कैंपों में रहकर वन क्षेत्र, झाड़ झंखाड़, घास के मैदान और नदी आदि स्थानों में पक्षियों के बसेरा स्थलों पर डाक्यूमेंट्री तैयार की। ई-बर्ड ऐप तैयार किया गया।
क्षेत्र संचालक ने बताया सर्वेक्षण के दौरान टीमों को 247 प्रजातियों के पक्षी मिले। इनमें 21 प्रजातियां आईयूसीएन की संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल हैं। सर्वेक्षण में 7 प्रजातियों के गिद्ध काफी संख्या में पाए गए। क्षेत्र संचालक ने बताया कि ओरिएंटल पाइड हार्नबिल पक्षी सिर्फ पन्ना में ही मिलने का रिकार्ड है। इसके अलावा स्ट्राइटेड ग्रास बर्ड जो बहुत दुर्लभ है, वो भी यहां केन नदी के अलग-अलग हिस्सों में काफी संख्या में देखी गईं। इससे यह यह पता चलता है कि केन नदी का पर्यावास इनके लिए अनुकूल है।
दुर्लभ प्रजातियों के भी पक्षी मिले
बांदा/करतल। सर्वेक्षण में जो दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी मिले हैं उनमें व्हाइट-टेल्ड आयोरा (मार्शल आयोरा), ओरिएंटल पाइड-हार्नबिल, स्ट्राइटेड ग्रास बर्ड, टाइटलर्स लीफ वार्बलर, ब्लैक विंग्ड कुक्कू श्राइक और ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क आदि पक्षी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि व्हाइट-टेल्ड आयोरा का मध्य प्रदेश से ईबर्ड पर यह पहला रिकार्ड है।
दो बार और होगा पार्क में पक्षी सर्वेक्षण
बांदा/करतल। पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन निर्णय लिया है कि पहले पक्षी सर्वेक्षण के बाद अब इस वर्ष दो बार और पक्षी सर्वेक्षण कराया जाएगा। एक सर्वेक्षण बारिश से पहले और दूसरा शीत ऋतु के बाद होगा। क्षेत्रीय संचालक के मुताबिक इससे यहां के पक्षियों और उनके महत्वपूर्ण पर्यावास को और ज्यादा जानने का मौका मिलेगा। साथ ही पक्षियों की जरूरत के मुताबिक विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी।
यूनेस्को की सूची में पन्ना टाइगर पार्क
बांदा/करतल। पन्ना टाइगर रिजर्व उत्तर-मध्य हाईलैंडस के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों में शामिल है। यहां बायोस्फीयर रिजर्व भी है जिसे यूनेस्को के बर्ड नेटवर्क आफ बायोस्फीयर रिजर्व में शामिल किया गया है। लगभग 1600 वर्ग किलोमीटर में फैले पन्ना टाइगर पार्क में पठार, घाटियां, घास के मैदान, घने जंगल और केन नदी है। यह तमाम पक्षियों और जीव जंतुओं को उनके अनुकूल आवास स्थल मुहैया कराते हैं।
प्रथम पन्ना बर्ड (चिड़िया) सर्वे का प्रमाण पत्र देते क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा। संवाद - फोटो : BANDA
पन्ना टाइगर रिजर्व में पक्षी सर्वेक्षण के दौरान मिलीं दुर्लभ प्रजातियों की चिड़ियां। संवाद - फोटो : BANDA
पन्ना टाइगर रिजर्व में पक्षी सर्वेक्षण के दौरान मिलीं दुर्लभ प्रजातियों की चिड़ियां। संवाद - फोटो : BANDA
पन्ना टाइगर रिजर्व में पक्षी सर्वेक्षण के दौरान मिलीं दुर्लभ प्रजातियों की चिड़ियां। संवाद - फोटो : BANDA
पन्ना टाइगर रिजर्व में पक्षी सर्वेक्षण के दौरान मिलीं दुर्लभ प्रजातियों की चिड़ियां। संवाद - फोटो : BANDA