बलरामपुर। श्रीश्री 108 श्रीराम लीला संकीर्तन समिति भगवतीगंज की तरफ से भगवती आदर्श विद्यालय प्रांगण में शनिवार की रात माता सीता के स्वयंवर एवं भगवान श्रीराम के विवाह का मंचन किया गया। परशुराम व लक्ष्मण जी के संवाद को सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए।
बताते चलें कि श्रीश्री 108 श्रीराम लीला संकीर्तन समिति भगवतीगंज की तरफ से पिछले 78 वर्षों से लगातार रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार की रात रामलीला मंचन में सीता स्वंयवर, परशुराम-लक्ष्मण संवाद व राम विवाह का प्रसंग दिखाया गया।
सीता स्वयंवर में सबसे पहले महराज जनक का प्रवेश होता है। ऋषि विश्वामित्र भगवान श्रीराम व लक्ष्मण जी का परिचय कराते हैं। जनक जी स्वयं की शर्त बताते हैं। स्वयं की शर्त के अनुसार सभी राजा धनुष उठाने का प्रयास करते हैं लेकिन कोई भी सफल नहीं होता है।
जनक जी की निराशा को देखकर ऋषि विश्वामित्र भगवान श्रीराम को धनुष उठाने की आज्ञा देते हैं। भगवान श्रीराम के प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट जाता है। शिव धनुष टूटने की आवाज सुनकर क्रोध से भरे परशुराम जी राजा जनक की सभा में प्रवेश करते हैं।
यहां पर भगवान परशुराम व लक्ष्मण जी के बीच काफी नोक झोंक होती है। भगवान परशुराम व लक्ष्मण जी के बीच विवाद बढ़ता देख भगवान श्रीराम आगे आते हैं और परशुराम जी को शांत करते हैं। परशुराम जी भगवान श्रीराम व माता सीता को आशीर्वाद देकर चले जाते हैं।
राम-विवाह के लिए जनक जी राजा दशरथ व बारात को आमंत्रित करने के लिए अपना दूत अयोध्या भेजते हैं। दूत से निमंत्रण पाकर दशरथ जी भरत व शत्रुहन सहित भव्य बारात लेकर जनकपुरी पहुंचते हैं जहां पर भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण व शत्रुहन जी का विवाह संपन्न होता है।