बलरामपुर। विशेष सत्र न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में चार लोगों को दोषी करार दिया है। न्यायाधीश ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास और एक दोषी को सात साल कैद की सजा सुनाई है। घटना में नेपाल देश से खरीदारी करने बलरामपुर आईं छह किशोरियों से बलपूर्वक दुष्कर्म किया गया था। आरोप पत्र दाखिल होने के दस महीने के अंदर मामले में फैसला सुनाया गया है।
विशेष लोक अभियोजक पवन कुमार शुक्ला ने बताया कि थाना हरैया में नेपाल देश की रहने वाली एक महिला ने 26 जून 2022 को मुकदमा लिखने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। महिला ने आरोप लगाया था कि नेपाल के जिला दांग में स्थित बैरवा इलाके से छह लड़कियां साइकिल से खरीदारी करने मणिपुर बाजार आ रहीं थीं। रास्ते में जंगल में इनको ग्राम जयरामपुर खादर निवासी चंदर उर्फ रामचंदर पासवान, राजेंद्र पासवान, राकेश पासवान व पिंटू पासवान ने इन्हें बंधक बना लिया और किशोरियों के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने मुकदमा लिखकर विवेचना शुरू की और पीड़िताओं का बयान दर्ज कराया गया।
पुलिस मॉनीटरिंग सेल प्रभारी इंस्पेक्टर केके यादव ने बताया कि पीड़िताएं हिंदीं नहीं बोल पाती थीं, इसलिए उनका बयान दर्ज कराने के लिए ट्रांसलेटर (द्विभाषीय) का प्रयोग किया गया। पीड़िताओं का चिकित्सकीय परीक्षण कराकर मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर चारों लोगों के खिलाफ आरोप पत्र 16 सितंबर 2022 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने 13 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट जहेंद्र पाल सिंह ने तीन आरोपियों को सामूहिक दुष्कर्म का दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने आरोपी चंदर उर्फ रामचंदर पासवान, राजेंद्र पासवान व राकेश पासवान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि चौथे आरोपी पिंटू पासवान को बालिकाओं से छेड़खानी करने का दोषी करार देते हुए सात साल कैद की सजा सुनाई है।
विशेष पैरवी कर अपराधियों को दिलाई सजा
मुकदमे की नोडल अधिकारी व एएसपी नम्रिता श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस ने प्रभावी पैरवी करते हुए 90 दिन के भीतर आरोप पत्र प्रस्तुत किया। पुलिस ने 10 महीने में आरोपियों को सजा भी दिलाई है। दो देशों के बीच का मामला होने के कारण केस के दौरान पीड़िताओं को आने व जाने के समय पुलिस अभिरक्षा मुहैया कराई जाती थी। गवाहों का बयान दर्ज कराने में भी पुलिस ने विभागीय ट्रांसलेटर का सहयोग लिया।