बलरामपुर। बाढ़ संकट से होने वाली त्रासदी से लोगों को बचाने के लिए सरकार ने बजट में इसका जिक्र किया है। कहा है कि बाढ़ नियंत्रण के लिए नेपाल से वार्ता करके दोनों देश मिलकर योजना बनाएंगे। सरकार की इस पहल से जिले के लोगों में बड़ी राहत की उम्मीद जगी है।
दरअसल, नेपाल के पानी छोड़ने के कारण जिले के करीब 385 गांव हर साल बाढ़ के संकट से जूझते हैं। करीब तीन लाख की आबादी को बाढ़ का कहर झेलती है। सबसे ज्यादा संकट नेपाल के पानी छोड़ने से राप्ती नदी में उफान आने के कारण होता है। यही नहीं, करीब 17 पहाड़ी नाले हैं, जहां से नेपाल का पानी सीधे गांवों में पहुंचता है। बाढ़ के कारण हर साल करीब 50 करोड़ रुपये की संपत्ति व फसलों का नुकसान होता है।
बाढ़ की समस्या के स्थाई समाधान को लेकर कई बार प्रयास किए गए लेकिन, वह धरातल पर नहीं उतर सके। ऐसे में अब सरकार की ओर से बजट में बाढ़ नियंत्रण को लेकर की गई पहल पर रिटायर्ड बैंककर्मी कमल तिवारी कहते हैं कि सरकार का यह निर्णय आम जनता के हित में है। इससे करीब तीन लाख की आबादी को हर साल होने वाली समस्या से निजात मिल सकेगा। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति सदस्य शेरावाली शुक्ला का कहना है कि बाढ़ को लेकर सरकार हमेशा गंभीर रही है। ऐसे में यह प्रयास बलरामपुर के साथ ही श्रावस्ती व बहराइच के लोगों को भी काफी राहत देगा।
बाढ़ नियंत्रण में होगा फायदेमंद
बाढ़ नियंत्रण को लेकर नेपाल के साथ मिलकर योजना बनाये जाने से काफी हद तक हम बाढ़ की आपदा को नियंत्रित कर सकते हैं। जैसे अभी तक हमें पहले से यह जानकारी नहीं मिल पाती है कि नेपाल से कब पानी छोड़ा जाने वाला है। उसका प्रसार कैसा होगा। यदि जानकारी पहले मिल जाय तो काफी हद तक बाढ़ नियंत्रण की स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है। - अरुण सिंह, आपदा विशेषज्ञ