बलिया। नगर के चौराहों पर लगी महापुरुषों की प्रतिमाएं का महत्व जयंती और पुण्यतिथि तक रह गया है। साल के बाकी दिन यहां की दुर्व्यवस्था को कोई देखने वाला नहीं रहता। रखरखाव के अभाव में इनमें से अधिकतर के चबूतरे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई प्रतिमाओं पर धूल की कई परतें जम गई हैं। साफ-सफाई तभी होती है, जब कोई राष्ट्रीय त्योहार सिर पर होता है। इसके पहले या बाद में, न तो प्रशासन की नजर इस ओर जाती है और न ही कोई स्वयंसेवी संस्था दिलचस्पी लेती है।
शहर के चौक शहीद पार्क स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित है। दो अक्तूबर को जयंती देखकर नगरपालिका प्रशासन की ओर से इसकी साफ-सफाई की गई है लेकिन भृगुआश्रम स्थित लालबहादुर शास्त्री की प्रतिमा का कोई पुरसाहाल लेने वाला नहीं है। जबकि उनकी भी जयंती दो अक्तूबर को ही मनाई जाती है। इसके अलावा, नगर के लगभग नौ चौराहों पर स्वतंत्रता सेनानी और महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। कुछ चौराहों पर लगी प्रतिमाओं को ऊपर से ढंक दिया गया है लेकिन अभी अधिकांश को उनकी छत भी नसीब नहीं है। सुरक्षा की दृष्टिकोण से प्रतिमाओं के चारों तरफ बनाई गई दीवारें कई स्थानों पर टूट गई हैं। बावजूद इसके, इनकी मरम्मत के लिए किसी भी स्तर पर कोई पहल नहीं की जा रही है। नगर के टीडी कॉलेज चौराहे पर लगी सेनानी रामदहिन ओझा की प्रतिमा इन दिनों आकर्षण का केंद्र जरूर बनी है, लेकिन अन्य प्रतिमाएं दुर्दशा का दंश झेल रही हैं। चाहे चित्तू पांडेय की मूर्ति हो या अन्य की, सभी बदहाल हैं। कइयों पर तो सिनेमा के पोस्टर चिपके हुए हैं। कुछ के पास तो अराजकतत्वों को जुआ खेलते हुए अक्सर देखा जाता है, लेकिन पुलिस प्रशासन इनके खिलाफ कार्रवाई करना भी मुनासिब नहीं समझता।
साफ-सफाई के साथ-साथ सभी प्रतिमाओं को आकर्षक और सुंदर बनाने का काम शुरू हो गया है। कई प्रतिमाओं को आकर्षक रूप दिया जा रहा है। इन्हें और बेहतर लुक देने की योजना बनाई जा रही है। - दिनेश कुमार विश्वकर्मा, ईओ नगरपालिका, बलिया