इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि गोवध निरोधक कानून के तहत कोर्ट को वाहन जब्त करने का आदेश देने का अधिकार है। इसलिए जब्त वाहन को मुक्त करने की अर्जी खारिज करने के अधीनस्थ अदालतों के आदेश विधि सम्मत है।
हाईकोर्ट ने जब्त वाहन मुक्त कराने की अर्जियों पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कानून के तहत कोर्ट को वाहन को जब्त करने का अधिकार है। यह आदेश न्यायमूर्ति डा वाईके श्रीवास्तव ने यास मोहम्मद की याचिका पर दिया है।
गोवध निरोधक कानून के तहत बलिया के बैरिया थाने में 21 सितंबर2020 को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। याची ने जब्त वाहन को मुक्त कराने की अर्जी दाखिल की। जिसे एसीजेएम बलिया ने खारिज कर दी। पुनरीक्षण अर्जी भी खारिज कर दी गई।
दोनों आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत गाय, बैल, सांड़ को वध के लिए वाहन से ले जाना अपराध है, जो दंडनीय है। वाहन जब्त किया जा सकता है।