जिला अस्पताल : दूषित पानी और संक्रमित भोजन टाइफाइड का प्रमुख कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
बलिया। जिले में बदलते मौसम का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बारिश, तेज धूप और उमस के बीच वायरल बुखार, टाइफाइड, सर्दी-जुकाम और हाईग्रेड फीवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसका असर जिला अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इमरजेंसी में उल्टी-दस्त, फूड पॉइजनिंग और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। अस्पताल में रोजाना करीब 90 से 100 मरीज भर्ती हो रहे हैं।
सोमवार को त्योहार होने के बावजूद जिला अस्पताल की ओपीडी में 1,272 मरीजों ने उपचार कराया। सबसे अधिक भीड़ फिजिशियन ओपीडी में रही, जहां 318 मरीज पहुंचे। इसके बाद बाल रोग विभाग की ओपीडी में 187 मरीजों का उपचार किया गया। अन्य विभागों में भी मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि बदलते मौसम में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। बीते कुछ दिनों में वायरल संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मरीज तेज बुखार, शरीर दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, खांसी, जुकाम और कमजोरी जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई मरीजों में लंबे समय तक बुखार बने रहने पर टाइफाइड की आशंका को देखते हुए जांच भी कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि दूषित पानी और संक्रमित भोजन टाइफाइड का प्रमुख कारण है। वहीं लगातार बारिश के बाद निकलने वाली तेज धूप और उमस संक्रमण फैलने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। ऐसे मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है।
जांच कराने वालों की संख्या में वृद्धि
टाइफाइड और वायरल संक्रमण बढ़ने से जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में भीड़ बढ़ी है। प्रतिदिन 260 से 280 मरीज रक्त जांच कराते हैं। प्रयोगशाला प्रभारी शंभू यादव ने बताया कि चिकित्सक अधिकांश मरीजों की टाइफाइड जांच लिख रहे हैं। रोजाना तीन सौ से अधिक मरीजों की नौ हजार से अधिक जांचें होती हैं। अस्पताल में सभी जांचें 24 घंटे निशुल्क हैं।
बदलते मौसम में बरते सावधानी
केवल उबला या शुद्ध पेयजल का ही सेवन करें।
ताजा एवं स्वच्छ भोजन खाएं, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
हाथों की नियमित सफाई रखें और भोजन से पहले साबुन से हाथ धोएं।
तेज बुखार तीन दिन से अधिक रहने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लें।