बलिया। केंद्र और राज्य सरकार के दो विभागों की रार में 287868 क्विंटल चावल सरकार के सेंट्रल पूल में जमा नहीं हो पाया। हालांकि इसमें सात हजार क्विंटल चावल की फीडिंग गलत होने की बात कही जा रही है। इतना ही नहीं, जिलाधिकारी की कवायद के बावजूद ऊहापोह की स्थिति बनी रही। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि मामले का निस्तारण कर दिया गया है। मिलरों ने बकाया चावल के बदले सरकार की ओर से निर्धारित चावल का पैसा जमा करना शुरू कर दिया है।
जिले में हर साल क्रय केंद्रों पर किसानों से धान खरीद की जाती है। क्रय केंद्रों पर खरीदे गए धान की कुटाई के लिए राइस मिलों केे संबद्ध किया जाता है। राइस मिलरों को उठान किए गए धान के सापेक्ष 67 फीसदी चावल एफसीआई के गोदाम सेंट्रल पूल में जमा करना होता है। इसके बाद, मिलरों को सरकार की ओर से कुटाई का भुगतान किया जाता है। वर्ष 2020-21 में जिले के 75 क्रय केंद्रों पर 1.20 लाख एमटी धान की खरीद हुई। इसके बाद धान को निर्धारित मिलरों को कुटाई के लिए भेजा गया। सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) का पूरा चावल एफसीआई के सेंट्रल पूल में जमा नहीं हो सका। मिलरों का आरोप है कि एफसीआई तरह-तरह का बहाना बनाकर चावल को रिजेक्ट कर रही है। चावल उनके गोदामों में है। जिला विपणन अधिकारी ने बताया कि एफसीआई ने बकाया चावल का पैसा जमा करने की व्यवस्था दी है और मिलरों ने जमा करना शुरू कर दिया है।
सीएमआर का चावल जमा नहीं होने के मामले का सत्यापन किया गया और सभी चावल मिलरों के गोदाम में मिले। करीब सात सौ एमटी की फीडिंग गलत थी, जिसे सुधारने का काम चल रहा है। अब मामले का निस्तारण करा दिया गया है। बकाया सीएमआर के बदले मिलर पैसा जमा करेंगे। अब सात आठ मिलरों ने पैसा जमा भी कर दिया है। - अविनाश चंद्र सागरवाल, जिला विपणन अधिकारी, बलिया