बलिया। साधन सहकारी समितियों में अब किसानों को खतौनी दिखाने पर ही खाद मिलेगी। दरअसल, अब तक समितियों में किसानों को आधार कार्ड दिखाने पर खाद दी जाती थी। ऐसे में किसान मनमाने ढंग से ज्यादा खाद लेकर डंप कर लेते थे। इससे कई बार समितियों में खाद की किल्ल्त हो जाती थी। इससे समितियों पर मारामारी होती थी। दूसरी तरफ, जरूरतमंद किसान खाद लेने से वंचित रह जाते थे। अब इसे देखते हुए समितियों एवं पंजीकृत खाद की दुकानों पर खतौनी देखने के बाद फसल के रकबे के अनुसार खाद दी जाएगी।
जिले में 160 समितियां हैं। इनमें करीब 142 समितियां ही सक्रिय है। जबकि 893 से अधिक पंजीकृत खाद की दुकानें हैं, जिनमें करीब 500 एक्टिव है। जिले में खरीफ का दायरा एक लाख 17 हजार हेक्टेअर है। खरीफ के सीजन में सबसे ज्यादा धान की फसल में ही उर्वरक की मांग होती है। किसानों को खाद आधार कार्ड के जरिए दी जाती है। ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि बड़े किसान आधारकार्ड के जरिए जरूरत से अधिक खाद खरीदकर डंप कर ले रहे हैं। इससे डिमांड के अनुरूप खाद मिलने के बाद भी समितियों में किल्लत हो जाती थी। अधिकांश किसान खाद से वंचित रह जाते थे। इस बार धान की रोपाई के दौरान कई समितियों पर इस तरह की शिकायतें सामने आईं। समितियों पर खतौनी के जरिए रकबे का आकलन कर खाद दी जाएगी। जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार ने बताया कि आधारकार्ड पर खाद की खरीद में मनमानी की जाती थी। अब अधिक खाद के लिए खतौनी लगानी होगी।
जिले में हैं 4 लाख 21 हजार किसान
जिले में 4 लाख 21 हजार पंजीकृत किसान हैं। इनमें 2 लाख 80 हजार केसीसी कार्डधारक है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जिले में धान की खेती प्रमुख रूप से की जाती है। धान का दायरा इस बार ढाई हजार हेक्टेअर बढ़ा है। डिमांड के अनुरूप खाद समितियों पर आई है। शीघ्र ही एक यूरिया खाद का एक रैक जिले में आने वाला है, जिसे दो तीन दिन के अंदर दुकानों पर किसानों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।