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कोई नहीं पूछने वाला, सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति

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बलिया। कुछ दिनों पहले दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में फायरिंग और हत्या की घटना के बाद भी जिला व सत्र न्यायालय की सुरक्षा में लापरवाही बरती जा रही है। कोर्ट में बड़े-बड़े अपराधियों की पेशी हो रही है, मगर सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। प्रवेश द्वार पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, मगर वे मोबाइल देखने में व्यस्त रहते हैं। कौन आ रहा है और कौन जा रहा है, वे किसी को टोकते तक नहीं है। जिले के न्यायालयों में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, बलात्कार जैसे गंभीर आरोपियों के मुकदमों की सुनवाई हो रही है। करोना का संक्रमण सुस्त पड़ने के बाद कोर्ट में ऑफलाइन गवाही और बहस प्रारंभ हो गई है। मुकदमों के विचारण के लिए आरोपियों की कोर्ट में पेशी हो रही है। कोर्ट में प्रवेश करने के लिए सपा कार्यालय के सामने स्थित द्वार पर चेकपोस्ट बनाया गया है, मगर बगल से रास्ता खोल दिया गया है। इससे अधिकांश लोग बगल के रास्ते से न्यायालय परिसर में घुस जाते हैं। कोर्ट परिसर का एक दरवाजा पीडब्ल्यूडी तिराहे की तरफ है। दिनभर गेट खुला होने के कारण कोई भी व्यक्ति प्रवेश कर सकता है। हालांकि इस द्वार पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, मगर वे मोबाइल पर ही व्यस्त रहते हैं।
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झोला और बैग की भी नहीं होती पड़ताल
जिला व सत्र न्यायालय परिसर में घुसने वाले लोग चाहे झोला लिए हो या बैग कोई देखने वाला नहीं होता है। पुलिसकर्मियों के सामने ही लोग सामान लेकर घुस जाते हैं। जब कोई पूछता भी है तो कहते हैं कि कैदियों के लिए खाना और नाश्ता लिए हुए हैं। इस पर पुलिसकर्मी शांत हो जाते हैं।
न्यायालय परिसर के सभी प्रवेश द्वारों पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। अगर सुरक्षाकर्मी बगैर सघन तलाशी के लोगों को अंदर जाने की इजाजत दे रहे हैं, तो यह गलत है। जांच कर कार्रवाई जाएगी।
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- भूषण वर्मा, सीओ सिटी, बलिया।
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