बलिया। पिछले दो सालों से कृषि रक्षा विभाग महज दिखावा बनकर रह गया है। विभाग के किसी भी इकाई पर कोई भी कीटनाशक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। धान के फसल की सुरक्षा को लेकर किसानों को बाजारों से महंगे दामों पर कीटनाशक खरीदने पड़ रहे हैं।
हर साल खरीफ व रबी के दौरान किसी न किसी फसल में रोग लगने की समस्या सामने आती है और समय-समय पर कृषि रक्षा विभाग की ओर किसानों को रोगों से बचाव के लिए कीटनाशक आदि मुुहैया कराई जाती है लेकिन बीते दो सालों में तो खरीफ व रबी के दौरान कृषि रक्षा दवाएं जिले को उपलब्ध नहीं हो सकी।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अलग-अलग कृषि रसायनों के कुल 42650 किलो या लीटर लक्ष्य के सापेक्ष जिले में महज 31 किलो या लीटर ही रक्षा रसायन की उपलब्धता है। किसानों के फसलों की सुरक्षा को लेकर हर साल पर्याप्त मात्रा में कृषि रसायनों को शासन की ओर से मुहैया कराया जाता था। इन कृषि रक्षा रसायनों को जिले के प्रत्येक ब्लॉकों में स्थित कृषि रक्षा इकाईयों को उपलब्धता कराया जाता था जहां से किसानों को वितरण किया जाता था। लेकिन दो सालों से कृषि रक्षा रसायनों की उपलब्धता नहीं होने के कारण किसानों को महंगे दामों पर बाजारों से खरीदना पड़ता है। वर्तमान में धान की फसलें खेतों में है और लगातार बारिश हो रही है। इसके बाद धूप होने पर कई तरह के रोग लगने की संभावना होती है लेकिन जिले के किसी भी कृषि रक्षा इकाई पर दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। विभागीय अधिकारी की मानें तो मात्र बॉयोपेस्टिसाइड उपलब्ध है और वह पर्याप्त मात्रा में नहीं है।
बीते दो सालों से आवश्यक कृषि रक्षा रसायनों की आपूूर्ति नहीं होने के कारण किल्लत है। इस बाबत समय-समय पर शासन को डिमांड भेजी जाती है। - प्रियानंदा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी, बलिया