आठ सितंबर1978 को जब जेपी अंतिम बार अपने पैतृक गांव जयप्रकाश नगर (सिताब दियारा ) आए तो उस समय वह अस्वस्थ थे। फिर भी शुभचिंतकों से मिलने के इच्छुक थे। सूचना मिलते ही जेपी के यहां लोगो का तांता लग गया। तीन दिन तक गांव रहे लेकिन मिलने वालों का तांता नहीं टूटा।
जब वापस 11 सितंबर 1978 को हेलीकॉप्टर में बैठने लगे और चंद्रशेखर साथ में ही थे तो उन्होंने चंद्रशेखर से कहा कि 'ए चंद्रशेखर हमरा बिरना गऊआ सिताब दियारा खयाल रखिह' और उनकी आंखें भर आई। उस बात का मान रखते हुए पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अपने जीवन काल में जयप्रकाश नगर को अपनी कर्मस्थली मान लिया और हर सम्भव विकास करने का प्रयास किया।
समाजवाद के पुरोधा व सम्पूर्ण क्रांति के अग्रज रहे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के पैतृक गांव स्थित जयप्रकाश नारायण स्मारक प्रतिष्ठान परिसर में 11 अक्तूबर को जयप्रकाश नारायण की 119वीं जयंती मनाई जा रही है। ट्रस्ट के व्यवस्थापक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि जेपी जयंती पर प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी क्षेत्र के राजनीतिक व सम्मानित लोगों को आमंत्रित किया गया है। जेपी ट्रस्ट परिसर में स्थित प्रभावतीब देवी पुस्तकालय में ग्रामीण प्रौद्योगिकी केंद्र की तरफ से प्रदर्शनी व उद्यमिता जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया है।