प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वैना पर बृहस्पतिवार को प्रसव के बाद जच्चा बच्चा की तबीयत खराब हो गई। महिला अस्पताल ले जाते समय महिला की रास्ते में मौत हो गई। बच्चा एसएनसीयू वार्ड में भर्ती है। मौत की खबर पाकर परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों ने महिला के रेफर के बाद तैनात नर्स द्वारा दो हजार रुपये वसूलने व लापरवाही से प्रसव कराने का आरोप लगाया है।
जनपद में हर वर्ष अवैध नर्सिंग होम में लापरवाही से प्रसव के दौरान दस से 12 गर्भवती महिलाओं की असमय मौत होती है। इस वर्ष लगातार कई मौतों के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर अवैध अस्पतालों के खिलाफ अभियान चलाकर तालाबंदी की कार्रवाई हुई। स्वास्थ्य विभाग के बाबुओं की मिलीभगत से नाम बदलकर फिर से अस्पतालों का संचालन शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को पीएचसी पर प्रसव के बाद महिला की मौत से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची है। गड़वार थाना के नरायनापाली गांव निवासी ज्योति (24) पत्नी राजकुमार बुधवार को प्रसव पीड़ा होने पर दोपहर बाद वैना पीएचसी पर भर्ती हुई। वहां तैनात नर्स कुसुम वर्मा ने दूसरे दिन सुबह प्रसव कराया। कुछ समय बाद ज्योति की तबीयत बिगड़ने लगी, उसका शरीर ठंडा होने लगा। महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं होने के कारण मरीज की हालत गंभीर देख जिला महिला अस्पताल को रेफर कर दिया। वहां जांच के बाद इमरजेंसी में महिला चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। ज्योति का यह पहला प्रसव था। परिजनों ने रेफर करते समय नर्स द्वारा दो हजार रुपये लेने का आरोप लगाया। स्थानीय ग्रामीणों व तीमारदारों के अनुसार प्रसव केंद्र पर ग्रामीण तबके के आम लोग ज्यादा आते हैं, तैनात नर्स द्वारा प्रसव के बाद पैसा मांगा जाता है। इस बाबत प्रभारी डाॅ. धर्मेंद्र यादव ने बताया कि महिला को तेज बुखार था, प्रसव पीड़ा बढ़ने के कारण प्रसव के बाद महिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।