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बलिया: 11 वर्ष में गायब हो गए अनसूचित जनजाति के पौने दो लाख लोग, नहीं कोई रिकॉर्ड

Fri, 21 Jan 2022 03:44 PM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
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बलिया जिले से पिछले 11 वर्ष में अनुसूचित जनजाति के 1,73,778 लोग गायब हो गए हैं। जनगणना 2011 के अनुसार जिले में अनुसूचित जनजाति के कुल सदस्यों की संख्या 1,73,778 थी। बीते एक दशक में इन्हें और बढ़ जाना चाहिए था, लेकिन यहां मामला उलटा दिख रहा है। अब इनकी संख्या जिले में शून्य बताई जा रही है। यह कहां गए, यह बताने वाला कोई नहीं है। तहसील मुख्यालयों से भेजी गई रिपोर्ट में यह जरूर बता दिया गया है कि जिले के किसी भी कोने में अनुसूचित जनजाति का कोई भी परिवार या सदस्य निवास नहीं करता है।

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शासन के निर्देश पर जिला पंचायत राज अधिकारी की ओर से जिले के सभी तहसील मुख्यालयों को पत्र भेजकर वर्ष 2011 को जनगणना के अनुसार, जिले में अनुसूचित जनजाति की दिखाई गई जनसंख्या की वास्तविक रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया था। सभी तहसील मुख्यालयों की ओर से डीपीआरओ को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार जिले में अनुसूचित जनजाति का एक भी परिवार या सदस्य नहीं है।

इससे इस बिरादरी के लोगों को लंबे समय से अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र लेने के लिए सड़क पर संघर्ष करना पड़ा है। इतना ही नहीं बीते पंचायत चुनाव में जाति प्रमाण पत्र के अभाव में बिरादरी के लोगों को चुनाव लड़ने से महरुम होना पड़ा था।

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2011 की जनगणना में मिले थे 173778 लोग
जनगणना 2011 के अनुसार जिले में अनुसूचित जनजाति के कुल 173778 लोग थे। इनमें गोंड जाति के कुल 138942 और खरवार जाति के 34836 लोग शामिल थे। इनमें गोंड जाति के 39576 पुरुष, 38498 महिला और 60868 बच्चे शामिल थे। इसी प्रकार खरवार जाति के 9499 पुरुष, 9587 महिला और 15750 बच्चे थे।

जनगणना को नहीं माना जा रहा आधार
बलिया सदर तहसील के तहतसीलदार सदानंद सरोज के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना में मिले लोगों को अब अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में नहीं माना जा रहा है। क्योंकि ये जाति प्रमाणपत्र के लिए शासन के निर्देशों के अनुसार मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। शासन ने जो गाइडलाइन दी है, उसके अनुसार अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र देने के लिए 1950 से पहले राष्ट्रपति की ओर से जारी शासनादेश जिसमें जाति के कालम में जाति लिखी हो अथवा 1356 व 1356 फसली के साथ टीसी व शैक्षणिक प्रमाणपत्र, जिसमें जाति लिखी होनी चाहिए। यदि यह नहीं है तो अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सकता है।

वर्ष 2017 से पूर्व जिले में गोंड व खरवार बिरादरी के लोगों को सुगमता से अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी होता था, लेकिन प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आते ही इस पर रोक लगा दी गई और तमाम तरह के दस्तावेज मांगे जाने लगे। जबकि वर्ष 2011 में सरकार द्वारा ही जनगणना कराई गई थी, जिसमें जिले करीब पौने दो लाख लोग चिह्नित हुए थे। अब सरकारी नुमाइंदें ही सरकार के फैसले को गलत ठहरा रहे है। तभी तो जाति प्रमाण पत्र जारी करने में हीलाहवाली की जा रही है। - अरविंद गोड़वाना, प्रदेश प्रभारी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी।

प्रदेश की योगी सरकार ने गोंड व खरवार बिरादरी के वास्तविक लोगों को अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण जारी करने के लिए समय-समय पर शासनादेश जारी करने का कार्य किया है। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा इसमें बाधा उत्पन्न की जा रही है, जिससे लोगों को जाति प्रमाण पत्र मिलने में दिक्कत हुई है। हालांकि अब शासन के निर्देश पर जिले की विभिन्न तहसीलों में जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है। - तारकेश्वर गोंड, जिलाध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ भाजपा, बलिया।
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ब्लॉकवार अनुसूचित जनजाति की संख्या
विकास खंड जनसंख्या
पंदह 5665
मनियर 10565
रसड़ा 5972
रेवती 11615
चिलकहर 9761
मुरलीछपरा 9299
नगरा 6531
बांसडीह 16373
बैरिया 11146
सीयर 15115
बेलहरी 9329
हनुमानगंज 10932
सोहांव 7504
गड़वार 14886
नवानगर 10935
दुबहड़ 10301
बेरुआरबारी 6161
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