हल्दी। बलिया-बैरिया मार्ग के उत्तर बरसात के पानी ने किसानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। जलभराव ने करीब पांच हजार एकड़ की भूमि में करोड़ों की फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। इसे लेकर न तो प्रशासन सुध लेता है और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने ही पहल की है।
शहर के अमृतपाली, पिंडारी, बेलहरी, दुधैला, रेवती होते हुए देवपुर मठिया तक बरसात का पानी पिछले तीन-चार वर्षों से तबाही मचा रहा है। जो पांच से सात किमी चौड़ाई और करीब 30 किमी लंबाई में करीब पांच हजार एकड़ उपजाऊ भूमि पर करीब पांच माह पानी का कब्जा रहता है। इसके कारण तीन फसलों की जगह अब सिर्फ एक फसल ही किसान उगा पाते हैं। बताया जाता है कि 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने वरुणा ड्रेन बनाने की बात कही लेकिन वह भी केवल घोषणा तक ही सीमित रह गई। बगल के यमुना ड्रेन भी सफाई के अभाव में बंद पड़ा है। अगर यमुना ड्रेन की सफाई हो जाती तो किसानों के खेती योग्य हजारों एकड़ बर्बाद नहीं होता क्योंकि पानी घाघरा नदी में चला जाता, जैसे पहले जाता था।
किसानों की माने तो रोहुआ तिवारी, बहुआरा, समरथपाह, पियरौटा होते हुए देवपुर मठिया के पास घाघरा में यमुना ड्रेन मिलता है लेकिन यह भी सफाई के अभाव में अस्तित्व खोता जा रहा है। इसके अलावा, बीच में कई जगह बिना पुलिया सड़क निर्माण करा दिया गया है, जिसके कारण पानी जगह-जगह बाधित हो रहा है। प्रतिवर्ष हो रहे जलभराव के कारण विभिन्न गांवों के करीब पांच हजार एकड़ की फसल बर्बाद होती है। इस वर्ष भी दर्जनों किसानों ने एक ही खेत में तीन बार बीज डाला, बावजूद हाथ में कुछ नहीं लगा। खेतों से जल निकासी की व्यवस्था न होने से किसान चिंतित हैं। सैकड़ों एकड़ में मक्का की फसल तैयार हो गई थी लेकिन बरसात का पानी लग जाने के कारण सूख गया।