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जिलाध्यक्ष समेत चार नामजद व 250 अज्ञात के विरूद्ध केस दर्ज

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सुखपुरा। सरकारी एंबुलेंस कर्मचारियों का धरना तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। एंबुलेंस सेवा बंद होने से चिकित्सा सेवा चरमरा गई है। हालांकि इमरजेंसी सेवा के लिए चार एंबुलेंसों को छोड़ दिया गया है। ताकि मरीजों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो सके।
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इस दौरान 108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने एएलएस कर्मचारियों के समर्थन में करनई स्थित खाली मैदान में अपनी अपनी एंबुलेंस खड़ी कर तीसरे दिन भी नारेबाजी की। उधर, देर शाम जिला प्रशासन द्वारा जगह खाली करने के लिए निर्देश दिया गया। लेकिन एंबुलेंस कर्मचारी धरना स्थल पर जमे रहे। इस मामले में उप निरीक्षक विजय नारायण राय की तहरीर पर जिलाध्यक्ष रामपाल चौधरी समेत चार लोगों के विरुद्ध नामजद एवं 250 अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया।
तहरीर में उल्लेख किया गया है कि कोरोना काल में बिना प्रशासन की अनुमति के बिना 108, 102 एवं एएलएस के कर्मचारी करनई में 60 से 65 सरकारी एम्बुलेंस खड़ी का हड़ताल कर रहे हैं। इनके द्वारा ना तो सोशल डिस्टेसिंग का पालन किया गया है और ना ही मॉस्क लगाया गया है। इसके अलावा हड़ताल स्थल पर ना तो सैनिटाइजर ही उपलब्ध है। ये लोग कोरोना महामारी में संक्रमण फैलाने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही कोरोना काल में प्रतिबंध के बाद भी हड़ताल कर रहे हैं जबकि पूरे प्रदेश में एस्पा लगा हुआ है। इस मामले में जिलाध्यक्ष रामपाल चौधरी, जिला कोषाध्यक्ष निलेश कुमार यादव, जिला उपाध्यक्ष सुदर्शन मिश्रा, जिला महामंत्री सत्येंद्र यादव और अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए उकसा रहे हैं। इस मामले में पुलिस ने रामपाल चौधरी, निलेश यादव, सुदर्शन मिश्रा, सत्येंद्र यादव के विरुद्ध नामजद तथा 250 अज्ञात के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर कार्रवाई में जुट गई।
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एंबुलेंस कर्मचारियों की मांग
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- ठेकेदारी प्रथा तत्काल बंद की जाए।
- नई कंपनी एएलएस कर्मचारियों के निकालने के बजाय नौकरी पर रखे।
- समस्त 108, 102 व एएलएस कर्मचारियों को एनएचएम में विलय किया जाए।
- कर्मचारियों को समान कार्य, समान वेतन लागू किया जाए।
- कोरोना काल में शहीद हुए कर्मचारियों के परिजनों को तत्काल 50 लाख रुपये उपलब्ध कराया जाए।
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