बलिया। गुलाबों की नगरी सिकंदरपुर विधानसभा में समाजवादी पार्टी ने फिर साबित कर दिया कि ये उसका गढ़ है। सपा प्रत्याशी मतगणना के शुरुआत से ही भाजपा प्रत्याशी एवं विधायक संजय यादव पर बढ़त बनाए रहे जो अंत तक कायम रही। सपा के जियाउद्दीन रिजवी ने 78995 मत पाकर भाजपा विधायक संजय यादव को 11855 मतों से हराया। बसपा प्रत्याशी संजीव वर्मा यहां तीसरे स्थान पर रहे और जमानत बचाने में कामयाब रहे। हालांकि पहले तीन स्थानों को छोड़ अन्य प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।
वर्ष 2017 में संजय यादव ने सभी जातीय समीकरणों को ध्वस्त कर इस विधानसभा सीट से पहली बार कमल खिलाया था। उस समय भाजपा प्रत्याशी संजय यादव ने सपा के जियाउद्दीन रिजवी को 23 हजार से अधिक वोटों से हराया था। इससे पहले तक भाजपा इस सीट पर कभी दूसरे नंबर तक नहीं पहुंच पाई थी। इस बार भी संजय के सामने प्रतिद्वंद्वी के रूप में सपा से जियाउद्दीन रिजवी थे, लेकिन परिस्थितियां अलग हैं। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा के साथ सुभासपा खड़ी थी। इस बार सुभासपा सपा के साथ है। ऐसी स्थिति में शुरू से माना जा रहा था कि भाजपा की राह आसान नहीं है। मतगणना के शुरुआत से ही सपा के जियाउद्दीन रिजवी भाजपा प्रत्याशी पर बढ़त बनाए रहे। पूरी मतगणना के दौरान भाजपा प्रत्याशी सिर्फ हार का अंतर कम करते दिखे। रिजवी ने अपनी बढ़त लगातार कायम रखी। बसपा यहां तीसरे स्थान पर रही।
तीसरी बार विधायक बने रिजवी
बलिया। सलेमपुर लोकसभा में आने वाली जनपद की सिकंदरपुर विधानसभा सीट पर मुस्लिम और पिछड़ी जातियों की संख्या निर्णायक है। कई चुनावों में विधानसभा क्षेत्र में सपा औप बसपा के बीच लड़ाई सिमटती दिखी है। 2002 में सपा से जियाउद्दीन रिजवी विधायक बने थे। 2012 में फिर जियाउद्दीन रिजवी सपा से विधायक बने। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से संजय यादव ने उन्हें हराया था। अबकी बार रिजवी को यहां से तीसरी बार जीत मिली है।
लगातार दूसरी बार जीती चुनौती
सिकंदरपुर विधानसभा चुनाव में इस बार जनता ने मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी पर फिर भरोसा जताया है। रिजवी लोकदल के जमाने से राजनीति में आए। धीरे-धीरे वह एक चहेते नेता के रूप में अपने आप को सिकंदरपुर में प्रदर्शित किया। कई बार समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। सिवान कला गांव के मूल निवासी मो. रिजवी बचपन से ही राजनीति में रुचि रखते हैं। प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने से जहां भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी है वहीं, प्रत्याशी संजय यादव के हारने से उन्हें दुख जरूर हो रहा है। सपा खेमा अपने प्रत्याशी के जीत से जहां खुश है वहीं प्रदेश में सरकार नहीं बनने से दुखी है। 2017 के चुनाव में संजय यादव ने समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी को लगभग 23000 मतों से हराया था। इस बार बाजी पलट गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिकंदरपुर विधानसभा में लगातार आज तक कोई दोबारा विधायक नहीं बना।
1962 में अस्तिस्व में आई थी सीट
बलिया। जिले की सिकंदरपुर विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 1962 में हुआ था। तब कांग्रेस को जीत मिली थी। सीट कुल चार बार कांग्रेस के खाते में गई है। कांग्रेस से मार्कंडेय ने आखिरी बार 1991 में जीते थे। 1993 में सपा के दीनानाथ चौधरी ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली ती।
किसे मिले कितने मत
विधानसभा-सिकंदरपुर
कुल प्रत्याशी-11
कुल मतदाता-306473
कुल पड़े मत-176471
प्रत्याशी-दल-मिले मत
जियाउद्दीन रिजवी-सपा-75446
संजय यादव-भाजपा-63591
संजीव वर्मा-बसपा-29604
बृजेश सिंह गाट-कांग्रेस-1857
अशोक-जनअधिकारी पार्टी-2060
प्रदीप कुमार-आप-233
श्रीराम चौधरी-सीपीआई-752
धमेंद्र-निर्दलीय-322
मनोज-निर्दलीय-642
मोहन-निर्दलीय-377
सद्दाम हुसैन-498
नोटा1089
2017 का परिणाम
संजय यादव-भाजपा-69536-42.24%
जियाउद्दीन रिजवी-सपा-45988-27.94%
राजनारायण-बसपा-34968-21.24%