बलिया। वर्षों से मनरेगाकर्मी ईपीएफ कटौती की मांग कर रहे थे। अब शासन ने मनरेगा के संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों के मानदेय से ईपीएफ कटौती का निर्देश जारी कर दिया है। इससे जिले के 752 संविदा कर्मियों को लाभ मिलेगा।
जिले में वर्ष 2006-07 में मनरेगा योजना का शुभारंभ हुआ। हालांकि, एक साल बाद इस योजना का नाम बदल कर मनरेगा कर दिया गया। मनरेगा कार्यों को अमलीजामा पहुंचाने के लिए गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक संविदाकर्मियों की तैनाती की गई। हालांकि इन्हें मानदेय के लिए अक्सर जूझना पड़ता है। दूसरी तरह सालों से मनरेगा के संविदाकर्मी ईनपीएफ कटौती की मांग करते आ रहे थे। अब सरकार ने इनकी मांगों को देखते हुए ईपीएफ कटौती करने का फरमान जारी करते हुए कटौती का निर्धारण भी कर दिया है। इससे मनरेगा के 752 संविदाकर्मियों को काफी राहत मिलेगी। इसमें 687 रोजगारसेवकों के अलावा एपीओ, सहायक लेखाकार, कम्प्यूटर ऑपरेटर और तकनीकी सहायक हैं।
मनरेगा के तहत कार्यरत संविदा कर्मियों को ईपीएफ कटौती का फैसला शासन स्तर पर लिया गया है। शासनादेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। - डीएन दुबे, पीडी व प्रभारी मनरेगा उपायुक्त, बलिया