बलिया। रोजगार सेवकों के मानदेय के नाम पर गोलमाल का धंधा बदस्तूर जारी है। सालों तक काम नहीं करने के बावजूद उन्हें कागजों में बरकरार कर उनके नाम पर मानदेय की मांग कर धन का गोलमाल किया जा रहा। इसका खुलासा आरटीआई से मिली जानकारी से हो सका है।
जिले में मनरेगा पूरी तरह अधिकारियों व कर्मचारियों के भ्रष्टाचार का शिकार हो गया है। इसमें कार्ययोजना बनाने से लेकर काम कराने तक मनमानी की जाती है। रोजगार सेवकों को मिलने वाले मानदेय में गोलमाल हो रहा है। कुछ दिनों पहले शहर के निवासी नारायण कुमार ने जिलेभर के रोजगार सेवकों के कार्य व भुगतान के बाबत जानकारी सूचना अधिकार के तहत मांगी थी। हालांकि यह जानकारी अधिकारियों ने तब दी जब अफसरों को सूचना नहीं देने के कारण राज्य सूचना आयोग ने तलब किया। मिलीे जानकारी के अभिलेखों को देखें तो रोजगार सेवकों के मानदेय में खूब गड़बड़झाला किया गया है। बतौर उदाहरण दुबहड़ ब्लाक में एक जनवरी 2012 से 31 मार्च 2014 तक कुल 39 रोजगार सेवकों को मानदेय देने के लिए शासन से 11.85 लाख की धनराशि मिली लेकिन ब्लाक स्तर पर कुल 40 रोजगार सेवकों को ही इसे वितरित किया गया। इसमें दोपही, गजियापुर, शिवपुर दीयर नंबरी व टघरौली गांव के रोजगार सेवक शामिल नहीं किए गए। बताया जाता है कि घोड़हरा व सहरसपाली गांव के रोजगार सेवक बिहार प्रांत में शिक्षक बन चुके हैं और उन्होंने रोजगार सेवक पद से इस्तीफा भी दे दिया है। इसके बावजूद वर्ष 2016-17 में ब्लाक में रोजगार सेवकों की संख्या 39 ही है इनके अवशेष मानदेय भुगतान के लिए 10 लाख 92 हजार 630 रुपये शासन से मांग की गई है। अभिलेखों को देखें तो तीन साल पहले सूची में शामिल नहीं होने वाले गजियापुर के रोजगार सेवक संतोष कुमार, मोहनछपरा के मृतक रोजगार सेवक अविनाश पांडेय, शिवपुर दीयर नंबर के रोजगार सेवक राजू यादव व टघरौली के रोजगार सेवक पूनम यादव का नाम शामिल किया गया है। हैरानी की बात है कि ब्लाक स्तरीय अधिकारियों ने अपने 27 अप्रैल 2016 के आदेश में गजियापुर रोजगार सेवक पद को रिक्त मानते हुए ओझवलिया के रोजगार सेवक लक्ष्मण प्रसाद को अतिरिक्त कार्यभार भी दिया है। सूत्रों की मानें तो काम नहीं करने वाले रोजगार सेवकों के नाम पर शासन से धन की मांग कर गोलमाल किया जा रहा। यह गोरखधंधा सभी ब्लाकों में सालों से चल रहा है।
इनसेट...
सालों तक रोजगार सेवकों के गायब रहने पर उठ रहे सवाल
बलिया। संविदा पर कार्यरत रोजगार सेवकों की जिम्मेदारी मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों को मौके पर देखना व जॉब कार्डधारकों की उपस्थिति दर्ज करना होता है। सवाल उठता है कि जब तीन साल पहले एक जनवरी 2012 से 31 मार्च 2014 की सूची में दुबहड़ ब्लाक के गजियापुर, शिवपुर दीयर नंबरी, टघरौली के रोजगार सेवक के नाम नहीं थे तो पांच साल बाद इन्हें किस आधार पर मानदेय के लिए शामिल किया गया। सवाल यह भी उठता है कि पांच सालों तक गायब रहने के बावजूद संविदाकर्मी के खिलाफ अधिकारियों ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? अगर ब्लाक स्तरीय अधिकारियों ने पांच सालों तक मानदेय नहीं दिया तो इन रोजगार सेवकों ने आवाज क्यों नहीं उठाई?
कोट
रोजगार सेवकों की तैनाती बतौर संविदा के आधार पर की गई है और इन्हें लंबी छु्ट्टी नहीं दी सकती है। सालों तक गायब रहने के मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यूके पाठक, उपायुक्त, श्रम एवं रोजगार, मनरेगा