डिपो में जिन अनुबंधित बसों के 10 साल पूरे हो चुके हैं, उन्हें बेड़े से हटाया जा रहा है। बस मालिक इनकी जगह पर अपनी दूसरी बस लगाना चाहते हैं, लेकिन निगम के अधिकारी नियमों का हवाला देकर नवीनीकरण नहीं कर रहे हैं। ऐसे में बस मालिक परेशान हैं और समस्या से मुख्यालय के अधिकारियों को अवगत कराने की तैयारी कर रहे हैं। बीच का कोई रास्ता नहीं निकलने से बसों की संख्या भी कम हो जाएगी और इसका सीधा असर संचालन व्यवस्था पर पड़ रहा है।
बलिया डिपो में वर्तमान में 83 बसों का संचालन हो रहा है। अनुबंधित बसों के संचालन से ग्रामीण से शहरी रूटों पर आवागमन पहले से बेहतर हुआ है। हालांकि वर्ष 2020 में हुए नियम परिवर्तन ने अनुबंधित बस मालिकों को अब परेशान करना शुरू कर दिया है। इनकी बसें 10 साल की सेवा पूरी कर चुकी हैं। उन्हें अब बेड़े से हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। साढ़े नौ साल के बाद ही निगम की ओर से इन बस मालिकों को इस संबंध में नोटिस दे दिया जाता है। वर्ष 2020 के पहले तक नियम यह था कि 10 साल अनुबंध शर्त पूरा होने के बाद अनुबंधित बस मालिक उसकी जगह पर, उसी मार्ग और अनुबंध पर कुछ कागजी कार्यवाही पूरी कर दूसरी बस लगवा लेते थे। नया नियम लागू होने के बाद डिपो के बेड़े से 10 बसों के बाहर होने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में पहले से ही बसों की समस्या झेल रहे यात्रियों की मुसीबतें बढ़ जाएगी।
अनुबंधित बस मालिकों को अपनी बात परिवहन निगम के मुख्यालय तक पहुंचानी चाहिए। डिपो स्तर पर इसका निदान संभव नहीं है। 10 साल सेवा शर्त पूरी कर चुकी अनुबंधित बसों को बेड़े से हटाने के पूर्व बस मालिकों को नोटिस दिया जा रहा है। - महेश पांडेय, एकाउंटेंट, बलिया डिपो