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दो दशक से चल रहा खेल, कई बेगुनाहों को हुई जेल

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बहराइच। महराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज बहराइच के रेडियोलॉजी विभाग में फर्जी एक्सरे रिपोर्ट बनाने का खेल विगत 20 वर्षों से जारी है। 2014 में जब बहराइच जिला चिकित्सालय अपग्रेड होकर मेडिकल कॉलेज बन रहा था, तब शहरवासियों को उम्मीद जगी कि फर्जी एक्सरे रिपोर्ट बनाने का खेल अब खत्म होगा। लेकिन मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी यह खेल जारी रहा, बस मेडिकल रिपोर्ट बनाने वाले किरदार बदलते रहे। इस खेल में कई बार कार्रवाइयां हुईं डीएम से लेकर स्वास्थ्य महानिदेशक ने पत्र लिखा। कई पीड़ित हाईकोर्ट पहुंचे, लेकिन हुक्मरानों ने अपनी आंखें बंद कर ली। डॉक्टरों ने इस विभाग को मोटा धन कमाने की फैक्टरी बना दी। (संवाद)
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आरोपियों की गिरफ्तारी को दो बार पहुंची क्राइम ब्रांच बस्ती की टीम
सोहरवां, थाना रामगांव निवासी पीड़ित सुंदरलाल ने पुलिस महानिरीक्षक को अपनी आपबीती सुनाई थी। उन्होेंने बताया था कि कैसे फर्जी एक्सरे रिपोर्ट बनवाकर उन्हें जेल भेजवाया गया। इस प्रकरण पर दिसंबर 2020 में महानिरीक्षक ने बस्ती क्राइम ब्रांच को मामले की जांच कर कार्रवाई का आदेश दिया था। क्राइम ब्रांच ने जांच कर आरोपी आर्थोपैडिक डॉक्टर और एक्सरे टेक्नीशियन के खिलाफ चार्जशीट तैयार की और गिरफ्तारी के लिए दो बार दबिश दी। विवेचना अधिकारी इंस्पेक्टर (क्राइम ब्रांच) छोटे लाल ने बताया कि सुंदरलाल मामले में आरोपी आर्थोपैडिक डॉक्टर और एक्सरे टेक्नीशियन फरार मिले। कहा, दोनों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने अरेस्ट स्टे तो लोवर कोर्ट ने अग्रिम जमानत खारिज की
स्वयं को घिरता देख एक्सरे रिपोर्ट बदलने वाले आरोपियों ने 2021 में हाईकोर्ट में गिरफ्तारी से रोक लगाने की गुहार लगाई, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इस दौरान जब आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए क्राइम ब्रांच ने दबिश देना शुरू किया तो आरोपियों ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की। न्यायालय ने शुक्रवार को यह याचिका खारिज कर दी। अभी दोनों आरोपी मौके से फरार हैं। बावजूद इसके एक्सरे टेक्नीशियन का हस्ताक्षर प्रतिदिन रेडियोलॉजी विभाग की उपस्थिति पंजिका में हो रहा है। जाहिर सी बात है कि आरोपियों पर मेडिकल कॉलेज के हुक्मरानों का वरदहस्त है। आईओ छोटेलाल ने बताया कि चार मई को आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए दबिश दी गई थी। आरोपी कई दिनों से नदारद था, लेकिन उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर थे। सीएमएस को जब इस प्रकरण की जानकारी हुई तो उन्होंने रजिस्टर पर लिखे नाम के आगे गोल निशान लगा दिया।
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पूर्व डीएम ने भी लिखा था पत्र
दिसंबर 2012 में तत्कालीन जिलाधिकारी किंजल सिंह ने अस्पताल के अधिकारियों को चेतावनी भरा पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था कि उन्हें सूचनाएं मिल रही हैं कि रेडियोलॉजी विभाग में फर्जी रिपोर्ट तैयार की जा रही हैं। इसे तत्काल रोका जाए अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
रेडियोलॉजिस्ट न मिलने से आ रही दिक्कतें : प्राचार्य
महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एके साहनी ने फर्जी एक्सरे रिपोर्ट बनने के प्रकरण को स्वीकार करते हुए बताया कि फर्जी रिपोर्ट बनाने की प्रथा आज की नहीं बल्कि कई वर्षों की है। कई मामलों में पीड़ित सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे हैं। हम लगातार शासन को इस प्रकरण के प्रति अवगत भी कराते रहे हैं। रेडियोलॉजी विभाग के कई कर्मचारियों पर कार्रवाइयां भी की गई हैं। लेकिन इन्हें हटाने के बाद हम लाएंगे किसे? फर्जी रिपोर्ट बनने की शिकायतें आने पर हम शासन को अवगत कराते हैं। शनिवार को फिर पत्राचार किया है। विगत तीन वर्षों में 19 से 20 मामले इस तरह के आए हैं। उन्हें भी उच्चाधिकारियों को बताया गया है। उच्चाधिकारियों का कहना है कि एक-दो हफ्ते में कर्मचारियों को बदलने का कार्य किया जाएगा।
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