महसी/खैरीघाट (बहराइच)। अभी जनपद में बरसात काफी कम हुई है, लेकिन पड़ोसी देश नेपाल के पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश से जिले की नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। बैराज भी पानी से लबालब नजर आ रहे हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी किनारे बसे ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगी हैं। घाघरा व सरयू का जलस्तर बढ़ने से महसी के लगभग तीन दर्जन गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। स्पर व स्टड समेत अन्य स्थानों पर चल रहा मरम्मत कार्य भी ठप है।
घाघरा व सरयू नदियां उफनाने से प्रतिवर्ष महसी, कैसरगंज व नानपारा (आंशिक रूप से) में नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ तबाही मचाती है जिससे हजारों लोग प्रभावित होते हैं। नेपाल में हो रही मूसलाधार बरसात के कारण जनपद के बैराज पानी से लबालब होने लगे हैं। बैराजों से पानी नदियों में छोड़ने का क्रम शुरू हो गया है। इससे नदियों के जलस्तर में भी वृद्धि शुरू हो गई है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से महसी के नदी किनारे बसे पंडितपुरवा, भौंरी, जोगापुरवा, रानीबाग, लोनियनपुरवा, पचदेवरी, शंकरपुर, अहिरनपुरवा, छत्तरपुरवा, गोलागंज नई बस्ती व पिपरा समेत दो दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। महसी क्षेत्र में बाढ़ आने पर लगभग 65 गांवों को त्रासदी का सामना करना पड़ता है। बिसवां निवासी राममिलन मिश्र, उत्तम गुप्ता, जर्नादन सिंह व रामपाल का कहना है कि घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
ऐसे में आगामी कुछ ही दिनों में लोगों को बाढ़ की विभीषिका का सामना करना पड़ सकता है। उधर, महसी के खैरीघाट क्षेत्र में भी सरयू का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो गया है। सरयू का जलस्तर बढ़ने से लगभग एक दर्जन गांव नदी के मुहाने पर आ गये हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते दो दिनों से अचानक सरयू के जलस्तर में वृद्धि शुरू हो गई है। इससे क्षेत्र के नौव्वनपुरवा, पहलीपुरवा, मोतीपुरवा, चमारनपुरवा, सेवकपुरवा, हसमतपुरवा, पसियनपुरवा, परागी बेली व झुंडी समेत दर्जन भर गांव बाढ़ की कगार पर पहुंच चुके हैं। तिगड़ा ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान शिवमूर्ति वर्मा ने बताया कि प्रशासन की ओर से यहां बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने की सूचना देने पर क्षेत्रीय लेखपाल ने सिर्फ मौके का निरीक्षण किया है। नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से ग्रामीण दहशत में नजर आ रहे हैं।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने लगभग एक माह पूर्व संबंधित क्षेत्रों का भ्रमण कर मरम्मत कार्य तेज करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद स्पर की मरम्मत का कार्य तेज किया गया था, लेकिन घाघरा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही यहां मरम्मत कार्य भी ठप हो गया है। बेलहा-बहरौली तटबंध के किलोमीटर संख्या 55.700 पर बने स्पर नंबर एक की सुरक्षा के लिए यहां सुरक्षा दीवार बनवाने के लिए 3.54 करोड़ की लागत से कार्ययोजना तैयार कर काम शुरू कराया गया था। घाघरा की तेज लहरों को रोकने के लिए परक्यूपाइन लगाने व बोल्डर पिचिंग का कार्य भी लगभग साठ फीसदी हो गया था। अब जलस्तर बढ़ने से सभी मरम्मत कार्य ठप हैं।
सिंचाई विभाग के अभियंता वीबी पाल ने बताया कि शुक्रवार की सुबह दस बजे तीनों बैराजों से दो लाख, 42 हजार, 639 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। इसमें शारदा बैराज से एक लाख, 26 हजार, 629 क्यूसेक, गिरिजापुरी बैराज से एक लाख, 15 हजार, 127 क्यूसेक व सरयू बैराज से 883 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि एल्गिन ब्रिज पर घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 मीटर के सापेक्ष 105.06 मीटर मापा गया है। उधर, सरयू ड्रेनेज खंड के अवर अभियंता आशुतोष शर्मा ने बताया कि गोपिया बैराज से 11087 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। हालांकि, अभी बाढ़ की आशंका नहीं है, लेकिन नदी के मुहाने पर स्थित गांवों को बचाने की कोशिश की जा रही है।