बहराइच। जंगल में बढ़ रहा शोर शराबा वन्यजीवों के लिए खलल पैदा कर रहा है। इससे वन्यजीव आबादी की ओर बढ़ रहे है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या तेंदुओे की है। पिछले छह माह में अलग-अलग स्थानों पर 30 ग्रामीणों पर तेंदुआ हमला बोल चुका है। दो की मौत भी हो चुकी है। तेंदुओं का कुनबा गन्ने की फसल को अपना आशियाना बना रहा है। गन्ने की फसल कटती है तो तेंदुआ इंसानों पर हमला कर देता है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अलर्ट रहने की अपील की है।
551 वर्ग किलोमीटर में कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग फैला हुआ है। वन्यजीव प्रभाग में बाघ, तेंदुआ, हिरन, चीतल व वनरोज समेत अन्य जंगली जीव विचरण करते हैं। इस सुंदर नजारे को देखने के लिए देश-विदेश से भी लोग आते-जाते रहते है। जंगलों में मानव की लगातार बढ़ रही दखलअंदाजी वन्यजीवों को रास नहीं आ रही है। शायद यही कारण है कि अब धीरे-धीरे जंगल में विचरण करने वाले तेंदुए आबादी की ओर बढ़ रहे है। वहीं, वन विभाग का मानना है कि गन्ने की फसल कटने के बाद तेंदुए वापस जंगल की ओर लौट जाएंगे।
डीएफओ आकाशदीप बधावन ने बताया कि कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में कई गांव ऐसे बसे हुए हैं जो जंगल परिक्षेत्र या उससे सटे हैं। इससे हलचल काफी बढ़ गई है। इसके चलते जंगली जीव बाहर निकल रहे हैं। तेंदुआ को शांत माहौल पसंद होता है। यह शर्मीली प्रजाति के होते हैं। खतरा महसूस होने पर ही हमला करते है।
जब गन्ना कटता है तभी तेंदुए किसानों पर हमला करते हैं क्योंकि उनको लगता है कि उनका घर कोई उजाड़ रहा है। अब गन्ना कटने से पहले ग्रामीणों के साथ वन विभाग की टीम गश्त करेगी और हांका लगाएगी ताकि तेंदुए चले जाएं। इसके बाद ही किसान गन्ने की फसल काटेंगे।
- आकाशदीप बधावन, डीएफओ, कतर्नियाघाट