बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट में विदेशी पक्षियों के आगमन से नदियों, तालाबों, झीलों व आसपास की सुंदरता बढ़ गई है। कतर्नियाघाट में लगभग एक दर्जन से अधिक विदेशी पक्षियों की प्रजातियों ने कदम रखा है।
कतर्नियाघाट में दो साल बाद नए रंग और नए कलेवर के साथ पर्यटन सत्र की शुरुआत हो चुकी है। कतर्नियाघाट का जंगल जहां दुर्लभ जीव जंतुओं के लिए जाना जाता हैं, वहीं सर्दियों के मौसम में विदेशी पक्षियों की आमद भी जंगल की सुंदरता को चार चांद लगाती है। कतर्नियाघाट में बाघ, तेंदुआ, चीतल, बारासिंघा, हाथी, गैंडा, मगरमच्छ, घड़ियाल, डॉल्फिन व पक्षियों की कई प्रजातियां सैलानियों को रोमांचित कर रही हैं। सर्दियों के मौसम में विदेशी पक्षियों की चहचहाहट और कलरव भी पर्यटकों के मन को मोह रही है। गेरुआ और कौड़ियाला नदी में विदेशी पक्षियों का आगमन भी हो चुका है। कतर्नियाघाट की नदियों, तालाबों और झीलों में विदेशी पक्षियों की एक दर्जन प्रजातियों ने कदम रखा है। कतर्नियाघाट में आए विदेशी पक्षियों में लालसर व बत्तख पर्यटकों को काफी आकर्षित कर रही है। गेरुआ नदी में आंबाघाट, भवानीपुरघाट, नावघाट, मैला नाला झील, मंझरा झील व घाघरा बैराज में प्रवासी पक्षियों का कलरव देखने को मिलता है।
कतर्नियाघाट में आने वाले विदेशी पक्षियों में लेसर व्हिसलिंग डक, बार हेडेड गूज, कॉमन शेल्डक, रूडी शेल्डक, रेड क्रेस्टेड पोचर्ड, कॉमन पोचर्ड, टफ़टेड डक, पिनटेल, कॉमन कूट व साइबेरियन क्रेेन की आमद हो चुकी है। प्रवासी पक्षियों का आगमन नवंबर तक प्रारंभ हो जाता है। फरवरी और मार्च तक यह वापस अपने देशों के ओर लौटने लगते हैं।
प्रवासी पक्षी हिमालय के पार मध्य एवं उत्तरी एशिया एवं पूर्वी उत्तरी यूरोप से आते हैं। लद्दाख, चीन, तिब्बत, जापान, रूस, साइबेरिया, अफगानिस्तान, ईरान, बलूचिस्तान, मंगोलिया, पश्चिमी जर्मनी, हंगरी एवं भूटान से अत्यधिक ठंड एंव बर्फ जम जाने से भोजन एंव प्रजनन के लिए आते हैं।
कतर्नियाघाट जंगल में विदेशी पक्षियों का आगमन हो रहा है। कई प्रजाति की पक्षी आ गई है और कई आने वाली है। अगले एक सप्ताह के अंदर सभी विदेशी पक्षियां आमद कर देंगी। जो पर्यटकों को रोमांचित करेंगी।
आकाशदीप बथावन, डीएफओ कतर्नियाघाट