रिसियामोड़ (बहराइच)। जिले में गड्ढामुक्त सड़कों का दावा सिर्फ छलावा बनकर रह गया है। सड़क पर गड्ढों का जाल बिछा हुआ है। विकास की राह मजबूत करने वाली सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। जर्जर सड़कों ने विकास की रफ्तार को रोक दिया है। सड़क बनवाने की मांग को लेकर स्थानीय लोग कई बार डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक पत्र भेज चुके है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
प्रदेश सरकार भले ही गड्ढामुक्त सड़कों का दावा करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। रिसिया में इटकौरी सोखा गांव व जटेसर चौराहे से असम रोड को जोड़ने वाली सड़क पूरी तरह जर्जर है। डेढ़ साल से खराब सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं। हल्की सी बारिश में पानी भर जाता है। राहगीरों के अलावा छात्र-छात्राओं को भी स्कूल जाने में परेशानी हो रही है। आलम यह है कि जगह-जगह वाहनों चालकों को ब्रेक लगाना पड़ रहा है। थोड़ी सी चूक जानलेवा हो सकती है। बाइक सवार आए दिन चोटिल होते रहते हैं। स्थानीय लोग कई बार सड़क निर्माण को लेकर डीएम से लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेज चुके है, लेकिन ग्रामीणों को समस्या से निजात नहीं मिली।
सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। दूर से देखने में प्रतीत होता है कि सड़क नहीं बल्कि गड्ढे हैं। कई बार बड़ा हादसा होने से भी बचा है। सरकार गड्ढा मुक्ति के दावे कर रही है, लेकिन सब हवाहवाई है। जमीनी हकीकत देखनी हो तो सरकार के विधायक व सांसद को यहां का दौरा करना चाहिए।
इटकौरी सोखा गांव से जाने वाली सड़कें बदहाल हो चुकी है। जब सड़क खराब हो रही थी तभी जिम्मेदार लोगों को सूचना दी गई थी, लेकिन विभाग की लापरवाही व मरम्मत के अभाव में सड़क खस्ताहाल हो गई। इसका खामियाजा यहां के लोगों को उठाना पड़ रहा है।
जब भी इटकौरी सोखा गांव से असम रोड मार्ग की ओर जाना पड़ता है तो लोग एक बार सहम उठते हैं। जर्जर सड़क पर सफर करना किसी जोखिम से कम नहीं है। संभलकर जाने पर ही लोग सुरक्षित है वरना गिरकर चोट खा सकते हैं।
डेढ़ वर्ष से इटकौरी सोखा गांव से असम रोड को जाने वाली सड़क खराब है। जब सड़क में कुछ ही गड्ढे हुए थे तभी से स्थानीय लोग सड़क दोबारा बनवाने की मांग कर रहे है, लेकिन जिम्मेदार सुनवाई ही नहीं कर रहे हैं।