बहराइच। उत्तर प्रदेश आउट सोर्सिंग संविदा कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर जिले के रोडवेज संविदाकर्मी मंगलवार को प्रदर्शन मेें शामिल होने लखनऊ चले गए। ऐसे मेें जिला मुख्यालय स्थित रोडवेज बस अड्डे पर बसों का संचालन नहीं हो सका। बसों के पहिए थमने से दिनभर यात्री गंतव्य तक जाने को भटकते रहे। यात्रियों को मजबूरी में प्राइवेट व डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
उत्तर प्रदेश आउट सोर्सिंग संविदा कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने हक की मांग को लेकर लखनऊ में मंगलवार को प्रदेश व्यापी धरना-प्रदर्शन किया। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर रोडवेज बस अड्डे पर कार्यरत करीब 150 और बिजली विभाग मेेें कार्यरत 25 संविदाकर्मी लखनऊ मेें होने वाले धरना-प्रदर्शन के लिए मंगलवार भोर कूच कर गए थे। मालूम हो कि जिले के रोडवेज बस अड्डे से 117 बसें कागजों मेें पंजीकृत है। इसमें से करीब 70 बसें ही विभिन्न मार्गों पर संचालित हो रही हैं।
बसों मेें करीब 90 फीसदी आउट सोर्सिंग संविदा चालकों व परिचालकों की तैनाती है। इन कर्मचारियों के लखनऊ चले जाने से जिले से संचालित 90 फीसदी बसों के पहिये थम जाने से यात्रियों को खासी परेशानी उठानी पड़ी। यात्री गंतव्य तक जाने के लिए प्राइवेट वाहनों का सहारा लेने को विवश दिखाई दिए जबकि कई यात्रियों को बैरंग लौटना पड़ा। एआरएम मोहम्मद इरफान ने बताया कि उनका स्वास्थ्य खराब है। कुछ दिनों के लिए अवकाश पर हैं। अधीनस्थ कर्मचारियों को व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। सामूहिक अवकाश के कारण कुछ समस्या जरूर आई है।
आउट सोर्सिंग संविदा कर्मचारियों के लखनऊ चले जाने से रोडवेज बस अड्डे पर यात्रियों को खासी परेशानी उठानी पड़ी। कैसरगंज जाने के लिए इंतजार में बैठे यात्री अरुण कुमार ने बताया कि वह सुुबह से बस के इंतजार में बैठे हैं। तीन घंटे से अधिक हो गया है, लेकिन बस नहीं मिल सकी। लाल खां ने बताया कि उनको दवा लेने के लिए बाराबंकी जाना है।
सुबह से कोई बस नहीं मिली है जबकि दवा लाना जरूरी है। ऐसे मेें अब किसी प्राइवेट वाहन का ही सहारा लेना पड़ेगा। रहमान ने बताया कि उनको डॉक्टर को दिखाने लिए लखनऊ जाना था। मंगलवार को डाक्टर ने समय दिया था, लेकिन सुबह से बस के इंतजार मेें हैं। बस नहीं मिल रही है। मायादेवी भी सुबह से रोडवेज परिसर के एक किनारे बैठी बस का इंतजार करतीं नजर आईं। पूछने पर मायादेवी ने बताया कि उनको मल्हीपुर स्थित जमुनहा जाना है। पांच घंटे से कोई साधन नहीं मिल रहा है।