गायघाट (बहराइच)। बेटे का इलाज कराकर घर जा रहे पिता की गोद में बैठे मासूम को तेंदुए ने खींच लिया और उसे नोंचकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इलाज के लिए परिवार के लोग मासूम को लेकर अस्पताल ले जा रहे थे लेकिन रास्ते में मासूम ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। तेंदुए के हमले से ग्रामीणों में नाराजगी है। सूचना पाकर पहुंचे वनकर्मियों ने तेंदुआ को पकड़ने के लिए खेत में पिंजड़ा लगाया है। वनकर्मियों ने गश्त शुरू कर दी है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से सटे गांवों में बाघ और तेंदुए के हमले बढ़ गए हैं। आए दिन तेंदुए राह चलते ग्रामीणों पर हमले कर हैं। तेंदुओं के हमले में लोगों को जान गंवानी पड़ रही है। वन विभाग गश्त के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। कुछ यही हाल शुक्रवार रात को हुआ। मोतीपुर रेंज के चंदनपुर बढ़ैया के मजरा खाले बढ़ैया गांव निवासी राम मनोरथ अपने छह वर्षीय पुत्र अभिनंदन का इलाज कराने प्राइवेट चिकित्सक के यहां गए थे। देर रात को वह पुत्र को गोद में लेकर वापस घर जा रहे थे। गन्ने के खेत के निकट राममनोरथ पहुंचे तभी तेंदुआ खेत से निकलकर आया।
उसने गोद में लिए बेटे को खींच लिया। बेटे को बचाने के लिए राम मनोरथ ने तेंदुए से संघर्ष किया, लेकिन तब तक अभिनंदन गंभीर रूप से घायल हो गया। परिवार के लोग उसे अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बालक की मौत से परिवारीजन बिलखने लगे। तेंदुए के हमले की सूचना रेंज कार्यालय पर दी। वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र मौर्या की अगुवाई में वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। तेंदुए के हमले में बालक के मौत की पुष्टि की। तेंदुए पर नजर रखने के लिए वन विभाग की टीम ने गश्त शुरू कर दी है। प्रभागीय वनाधिकारी आकाशदीप बधावन ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगा दिया गया है।
डीएफओ ने बताया कि तेंदुए के हमले में बालक की मौत पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से 10 हजार रुपये की त्वरित सहायता दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृतक के आश्रित को चार लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा।
रात में तेंदुए के हमले में बालक की मौत हुई है। इसके लिए प्रशिक्षु आईएफएस विकास कुमार, पीएफएस अमित कुमार, वन क्षेत्राधिकारी की अगुवाई में तीन टीम लगी हुई हैं। साथ ही रैपिड रिस्पांस यूनिट भी लगी है। तेंदुए को पकड़ते ही उसे जंगल में छोड़ दिया जाएगा। लोग जंगल के निकट से समूह में ही निकलें जिससे हमले से बचा जा सके।
- आकाशदीप बधावन, डीएफओ, कतर्नियाघाट