केस नंबर एक
महावतपुर गांव में बनाए गए सार्वजनिक शौचालय पर हर समय ताला लटका रहता है और शौचालय का सीवर टैंक भी टूटा हुआ है, जिसमें गिरकर हादसे की आंशका है। अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
केस नंबर दो
बावली गांव के सार्वजनिक शौचालय की हालत में बद से बदतर है। ताला बंद होने की वजह से मजबूरन ग्रामीणों को खुले में शौच जाना पड़ता है।
केस नंबर तीन
खड़खडी गांव में तालाब के किनारे सार्वजनिक शौचालय तो दिया गया है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कभी इसका ताला खुला नहीं देखा। हर समय ताला लटका रहता है और शौचालय के चारों ओर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। ये तो मात्र तीन उदाहरण हैं। जनपद में बहुत से शौचालय ऐसे है, जिनमें रखरखाव के लिए लगाए गए केयर टेक तक वहां पर आकर नहीं देखते।
दावे सफाई के, गंदगी भरमार
सरकारी बैठकों में स्वच्छता को लेकर अधिकारी व जिम्मेदार बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन धरातल पर सभी दावे धराशायी होते नजर आ रहे हैं। शौचालयों के साथ-साथ उनके आसपास भी गंदगी के ढेर लगे हुए हैं।
ये बोले ग्रामीण
कभी भी हमारे गांव में बने सार्वजनिक शौचालय का ताला नहीं खुलता, जिन जरूरतमंद लोगों के घरों में शौचालय नहीं है, उन्हें मजबूरन खुले में शौच जाना पड़ता है। -जयपाल सिंह
सरकारी योजना के तहत बने शौचालयों का लाभ ग्रामीण नहीं ले पा रहे हैं, क्योंकि ज्यादातर शौचालयों पर या तो ताले लटके रहते हैं या फिर उनमें पानी व टोंटी की व्यवस्था नहीं है। -सहेन्द्रपाल
नियमित होती है सफाई
गांव व कस्बों में बने सभी शौचालयों पर नियमित सफाई कार्य चलता है। पानी की भी व्यवस्था है, अगर कहीं कोई कमी है तो जानकारी कर तुरंत दूर कराई जाएगी।- अमित त्यागी डीपीआरओ