210 ग्राम पंचायतों में मजदूरों की कमी के कारण शुरू नहीं हुआ कार्य, तीन ब्लाकों की प्रगति शून्य। 67647 मानव दिवस का लक्ष्य बना चुनौती, ढाई माह में सिर्फ 2461 मानव दिवस कराया गया कार्य।
मजदूरों को 100 दिन मजदूरी की गारंटी के लिए संचालित मनरेगा योजना मजदूरों की कमी के कारण जिले में परवान नहीं चढ़ पा रही है। योजना में कम मजदूरी से मजदूरों का मोहभंग हो रहा है। मजदूरों की कमी के कारण जिले के तीन ब्लाकों में मनरेगा की प्रगति शून्य है, तो 210 ग्राम पंचायतों में एक भी दिन मानव दिवस सृजित नहीं कराया गया है।
विज्ञापन
जिले की 244 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से तालाबों की खोदाई, सफाई के अलावा रास्तों का निर्माण, पौधरोपण का कार्य कराया जाता है। जिले में 34247 जॉबकार्ड धारक श्रमिक पंजीकृत है। योजना के अंतर्गत एक दिन में 213 रुपये मजदूरी दी जाती है। शासन ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में 67647 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य दिया है, जबकि अब तक केवल 2461 दिन ही कार्य दिलाया जा सका है। मजदूरों की कमी के कारण 210 ग्राम पंचायतों में एक भी दिन कार्य नहीं हुआ है। जिले के बागपत, छपरौली और खेकड़ा ब्लॉक में एक भी दिन कार्य नहीं हुआ है।
256 मजदूरों ने की मनरेगा में मजदूरी
जिले में कुल 34247 जॉबकार्ड धारक मजदूर है, इनमें से केवल 256 मजदूरों ने हीं मनरेगा में मजदूरी की। मजदूरी कम होने के कारण मजदूरों का योजना से मोहभंग हो रहा है। मजदूर मनरेगा में मजदूरी करने के बजाय हरियाणा, दिल्ली, मेरठ व अन्य जिलों में मजदूरी कर रहे हैं।
विज्ञापन
मनरेगा में कम है मजदूरी
निवाड़ा गांव के मनरेगा श्रमिक शाहिद का कहना है कि योजना के अंतर्गत एक दिन के 213 रुपये मिलते हैं। जबकि ईंट भट्ठों व फैक्ट्रियों में 400 से 500 रुपये दैनिक मजदूरी मिलती है। सरूरपुरकलां गांव के मनरेगा श्रमिक अनिल का कहना है कि मजदूरी कम होने के कारण वह सोनीपत में मजदूरी करने के लिए जाता है।
बागपत जनपद दिल्ली व हरियाणा से सटा है और जिले में ईंट भट्ठे भी काफी संख्या में हैं। मनरेगा में कम मजदूरी मिलने के कारण मजदूर दूसरे स्थानों पर मजदूरी के लिए जा रहे हैं। बीडीओ को लक्ष्य के सापेक्ष मनरेगा कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं।