बिलोचपुरा गांव में बलूचिस्तान की मुक्ति के लिए समर्थन मांगने आए बलूच नेता दिलशाद मजदक । फाइल
बागपत। पाकिस्तान में ट्रेन पर हमला कर यात्रियों को बंधक बनाने की घटना से बलूचिस्तान सुर्खियों में आया हुआ है। मगर, बलूचिस्तान को अलग देश बनाने के आंदोलन को विश्व स्तर पर धार देने को करीब आठ साल पहले बलूच नेता दिलशाद मजदक बागपत के बिलोचपुरा गांव में समर्थन मांगने आए थे।
उस समय ब्लूच नेता दिलशाद मजदक ने ग्रामीणों से कहा था कि पाकिस्तान दुनिया में आतंक फैला रहा है। बलूचिस्तान की आजादी की मांग दशकों पुरानी है। पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान से युवकों की हत्या करके शरीर से अंग निकालकर बेचती हैं। पाकिस्तान सरकार बलूचियों पर जुल्म करने के साथ बिजली, पानी तथा गैस तक नहीं देती।
उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि जब तक बलूचिस्तान आजाद नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बिलोचपुरा के लोगों ने बलूचिस्तान के समर्थन में प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। ग्रामीण इरफान पठान बताते हैं कि उनके पूर्वज 1526 में बलूचिस्तान से आकर दिल्ली में बस गए।
इसके बाद उनके पूर्वज वर्ष 1700 में बिलोचपुरा गांव में आकर बस गए थे। वर्ष 1857 में भारत की आजादी को लेकर अंग्रेजों के खिलाफ हुई क्रांति में उनके पूर्व अल्लादिया ने भाग लिया था।