बड़ौत। जनपद में डेढ़ सप्ताह से आई ड्रॉप खत्म हैं। बार-बार मांगने के बावजूद नहीं मिल रही हैं। आलम यह है कि चिकित्सकों को बाहर से दवा लेने के लिए लिखना पड़ रहा है।
जनपद में आठ सीएचसी, 23 पीएचसी और एक जिला अस्पताल है। इनमें रोजाना आंखों की बीमारी से संबंधित करीब 450 से 500 मरीज आते हैं। डेढ़ सप्ताह से जनपद में आई ड्रॉप खत्म है। जिस कारण आंखों की बीमारी से संबंधित मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। नेत्र रोगियों के लिए सबसे अधिक सिप्रोफ्लोक्सिन आई ड्रॉप की डिमांड रहती है। यह एंटीबायोटिक है। एलर्जी पीड़ित या अन्य मरीजों को दी जाती है। डेढ़ सप्ताह से दवा का स्टॉक जिले के अस्पतालों में खत्म है। अधिकतर गरीब मरीज सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं। जिससे उन्हें फ्री में उपचार और दवा मिल सके। चिकित्सक के परामर्श के बाद में बिना दवा के लौट रहे हैं। मरीजों को मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ रही है।
सरकारी अस्पताल में नहीं मिली दवा
फतेहपुर पुट्ठी गांव निवासी 86 वर्षीय हमीद का कहना है कि कम दिखाई देता है। आंखों में खुजली भी रहती है। उपचार के लिए सरकारी अस्पताल आया हूं, मगर दवा नहीं मिली है। अब बिना दवा के ही घर लौटना पड़ रहा है। मेरे पास दवा खरीदने के लिए रुपये नहीं हैं।
बाहर से 50 की मिलती है दवा
नगर निवासी बुजुर्ग अब्दुल रहमान नेत्र रोग से परेशान हैं। सरकारी अस्पताल में दवा नहीं मिलने से बाहर से दवा लेनी पड़ती है। अच्छी दवा कम से कम 50 रुपये में मिलती है। आई मंतरा की कीमत बाजार मेें 85 रुपये है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उधर, सीएचसी बड़ौत पर तैनात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार का कहना है कि यदि समय रहते आंखों से संबंधित मरीज आंखों में दवा नहीं डालेंगे तो आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
शासन को भेजी है डिमांड
इस संबंध में सीएमओ डॉ. दिनेश कुमार का कहना है कि शासन को आई ड्रॉप की डिमांड भेजी गई है। मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए दवा की व्यवस्था कराई जा रही है। बीच में आई ड्रॉप आई थी। स्टॉक कम होने के कारण थोड़ी परेशानी हो रही है।
50 हजार की भेजी गई डिमांड
वेयर हाउस इंचार्ज डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि सीएचसी, पीएचसी समेत जिला अस्पताल से लगातार आई ड्रॉप के लिए कॉल आ रही हैं। जनपद से 50 हजार की डिमांड भेजी गई है।