पांच-पांच गांव चयनित किए जाएंगे जनपद के प्रत्येक ब्लाक से स्मार्ट विलेज (गांव) योजना के तहत
पंचायती राज विभाग के कर्मचारी ब्लॉक वार सर्वे में जुटे
15 वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन और ग्राम पंचायत निधि से खर्च होंगा बजट
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। स्मार्ट विलेज (गांव) योजना के तहत जनपद के 30 गांवों की सूरत बदलेगी। इनमें शहर जैसी सभी सुविधाएं मिलेंगी। विकास कार्य पर खर्च के लिए मनरेगा, 15 वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन और ग्राम पंचायत निधि से धन लिया जाएगा। शासन के निर्देश पर पंचायती राज विभाग के अधिकारी और कर्मचारी जनपद के छह ब्लाक से से पांच-पांच गांव चयनित करने के लिए सर्वे में जुट गए है। हालांकि एमएलसी चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद इन गांवों में काम शुरू हो जाएगा।
शासन के निर्देश के बाद जनपद के छह ब्लॉकों में 30 गांवों का स्मार्ट गांव के रूप में विकास कराया जाना है। इन गांवों में पेयजल के लिए हर घर नल योजना भी लागू की जाएगी। गांव की सड़कें पक्की बनेंगी तो सोलर लाइट भी बिजली के खंभों पर लगाई जाएगी। प्राइमरी स्कूल में स्मार्ट क्लास चलेंगे तो सुरक्षा के लिए प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर पंचायत घर से पूरी मॉनीटरिंग भी होती रहेगी। ग्राम विकास विभाग से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि इन गांवों में पूरी तरह साफ सफाई रहे, इसके लिए प्लास्टिक मुक्त रखा जाएगा। साथ ही तालाब, पार्क, ओपन जिम, लाइब्रेरी, ग्राम सचिवालय व ग्राम सेवा केंद्र आदि का भी निर्माण कराया जाएगा।
एडीओ पंचायत सुधीर तोमर ने बताया कि शासन के निर्देश प्राप्त हुए है कि जनपद के प्रत्येक ब्लाक से पांच-पांच गांवों को चयनित कर उनमें सुविधाएं दी जाएगी। बताया कि फिलहाल एमएलसी चुनाव आचार संहिता लागू है। जैसे ही आचार संहिता खत्म होती है तो इन गांवों को चिह्नित कर काम कराने के लिए सीडीओ और डीपीआरओ को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
एक गांव में खर्च होगा 25 लाख का बजट
एडीओ पंचायत सुधीर तोमर ने बताया कि विकास कार्य पर खर्च के लिए मनरेगा, 15 वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन और ग्राम पंचायत निधि से धन लिया जाएगा। एक गांव में करीब 25 लाख तक का बजट खर्च होगा।
गांव में ही बनेंगे प्रमाण पत्र
एडीओ समाज कल्याण अधिकारी सुधीर पंवार ने बताया कि स्मार्ट गांव बनने के बाद ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी गांव में मिलेंगी। यानि मृत्यु और जन्म प्रमाण पत्र, मूल निवास, पेंशन व आय प्रमाण पत्र गांव में ही बनेंगे। ग्रामीणों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।